आगाज़-ए-सफ़र

कई सवाल थे, सदियों से किसी के शोषण की हज़ारों अनकही बेड़ियों में जकड़ी हर उस नारी के अंतर्मन में, जिसने तीन रुप से प्रहार करते हुए एक ही शब्द को सुना, तीन बार और क्षण मात्र में खो दिया, अपना संसार । बिखर गया था उसका जीवन। हर दिन कोसा है उसने, ऐसे संविधान के … Continue reading आगाज़-ए-सफ़र