राय, तुम यहाँ थे !

​२४ का १४ १० का ९ १५ का ५६ १४ का ३४..... चार साल के कमरों को गिनने के लय में, मैं अपने कॉलेज की आखिरी दिने गिन रहा था। दिन जैसे शून्य में गुज़र रहे थे।। कॉलेज ऐसा नशा बन चुका था, जिसे छोड़ने का मन नही कर रहा था। बी.आई.टी का हर कोना … Continue reading राय, तुम यहाँ थे !