​क्या सच में…मैं अब जा रही हूँ ?

यादें सहेज कर , सम्भाल कर अब मैं जा रही हूँ, इस उलझन में हूँ कि ये सब आपसे कह रही हूँ या खुद को बतला रही हूँ, क्या सच में...मैं अब जा रही हूँ ? चलो... अब तो जाने का वक़्त है, किसी से रूठी हूँ तो खुद मान जाने का वक़्त है, जो … Continue reading ​क्या सच में…मैं अब जा रही हूँ ?

1st March. Late night. I was using my Android phone – the most customary way for youth to fleet their time and I am certainly, no exception. 12 AM. And gradually my Whatsapp inbox starts flooding with Holi wishes. I switched to Facebook and a computer-generated message was patiently waiting to greet me with “Happy … Continue reading

आगाज़-ए-सफ़र

कई सवाल थे, सदियों से किसी के शोषण की हज़ारों अनकही बेड़ियों में जकड़ी हर उस नारी के अंतर्मन में, जिसने तीन रुप से प्रहार करते हुए एक ही शब्द को सुना, तीन बार और क्षण मात्र में खो दिया, अपना संसार । बिखर गया था उसका जीवन। हर दिन कोसा है उसने, ऐसे संविधान के … Continue reading आगाज़-ए-सफ़र