गुरुवर – आप क्या हो?

उन नन्हें कोमल उंगलियों में उलझे वो कलम साफ थे, उस छोटी-सी उलझन को सुलझाने वाले आप थे, गुरुवर वो आप थे। 'अ' अक्षर पर दौड़ते, रहते, लड़खड़ाते कर साफ थे थरथराते हथेलियों को थामने वाले आप थे, गुरुवर वो आप थे। मुख से निकलते वो टूटे-फूटे शब्द साफ थे, पर शब्दों की अहमियत बतलाने … Continue reading गुरुवर – आप क्या हो?

आओ मिलकर दीप जलाएं

प्रकाशपर्व की मधुर बेला में आओ मिलकर दीप जलाएं स्नेह-साधना करें अनवरत जग में नव प्रकाश फैलाएँ| आलोकित हो हर घर, आँगन हर घर कुछ यूँ जगमगाए झिलमिल दीपों के क्षण पावन हर्ष का एहसास कराए| जलाएँ दीप चहुँओर आओ, मिलकर सभी आगे आएँ अंत करें तम निशा का रजनी को नव भोर बनाएँ| शुभ-लाभ … Continue reading आओ मिलकर दीप जलाएं

है ये ज़िंदगी

ज़िन्दगी क्या है, किस लिए है? वास्तव में यह कोई समझ नहीं पाया। हर शख्स इसे अपने अनुसार जीना चाहे, पर कांटों से भरी पड़ी है जिंदगी की राह, बावजूद इसके कभी न कम होगी जीने की चाह। कभी ठोकरें खाई, उदास हुए कभी सफलता मिली तो मुस्कराए । हर पल बदलती रही यह जिंदगी, … Continue reading है ये ज़िंदगी

क्यों हो गए हो जीवन से निराश, क्यों छोड़ बैठे हो मंज़िल पाने की आस । माना की तेरी राह में मुश्किलें तमाम होंगी, कई बार तेरी कोशिशें भी नाकाम होंगी। मुश्किलों से डर कर कभी रुक मत जाना, कठिनाईयों के आगे कभी झुक मत जाना। हौसला रख और आगे बढ़, मंज़िल तू पा जाएगा। … Continue reading

अधूरे सपने

आँखों में बसा एक ख्वाब लेकर आयी हूँ, जीवन में अपने कुछ खास करने आयी हूँ, आप लोगों की इनायत सही रही तो, इतिहास में दर्ज करवाने अपना नाम आयी हूँ। क्या बताऊँ इस दुनिया की हालत, यहाँ तो मुख़्तलिफ़ लोगों  का ही बसेरा है, जहाँ मैंअपना ख्वाब पूरा करने आयी, यहाँ तो इंसानियत नहीं, हैवानियत का लगा … Continue reading अधूरे सपने

स्त्री का सम्मान

"आज भी महारानी देर से आएगी" गुस्से से रितु मैडम तमतमा रहीं थी। उनके यहाँ काम करने वाली सरला पिछले दो दिनों से देर से आ रही थी, जिसकी वजह से उनकी अति व्यस्त दिनचर्या गड़बड़ा रही थी। सरला जैसे ही आयी, रितु मैडम बरस पड़ी उसपर।" मज़ाक समझ के रखा है क्या काम को … Continue reading स्त्री का सम्मान