तुम गए नहीं

उस आखिरी शाम, ‌तुम्हारी उंगलियाँ मेरे पसीने से नम हाथों से ‌फिसल तो गईं ‌लेकिन, ‌तुम गए नहीं। ‌ तुम्हारी कमीज का वो बटन , ‌हर सवेरे जो कमजोर हो टूट जाता था, ‌आखिरी दफा ‌पक्के धागे से सिलकर ‌चला गया था, ‌लेकिन , ‌तुम गए नहीं। ‌ ‌सदियों से मेज पर सजती दो प्यालियाँ … Continue reading तुम गए नहीं