तू है नहीं

हाँ,तू है नहीं तो क्या, अगर तू है नहीं। कहने को तो कह दिया, पर बात इतनी भी साधारण नहीं रोने को तो रो लिया, पर आँसुओं की किसी को आदत नहीं। बहुत सोचती थी किसी को अपनी सोच बताती, कि किसी की हमदर्द हमराही बन जाती पर सोच का कोई हमसफ़र नहीं शायद इसलिए … Continue reading तू है नहीं

रूह की आज़ादी

शायर है ये दिल, कुछ न कुछ लिखता रहता है सुनता तो कम ही है मेरी, अक्सर कुछ न कुछ कहता रहता है। जिन्हें कागज़ पे उकेरा, वो तो आज भी सलामत हैं बाकी रेत पे लिखे जज़्बातों को, कब का समुन्दर बहा ले गया। चाँदनी रात के तले, मैं उस से सब कुछ कह … Continue reading रूह की आज़ादी

आसां कहाँ है ?

१.हवाएँ भी कभी-कभी शैतानियाँ करती हैं, कभी पेड़ों से, कभी पहाड़ों से बेईमानियाँ करती हैं, जब शाम ढले खेतों से होकर गुजरती हैं, किसानों के छोटे बच्चों संग नादानियाँ भी करती हैं, मंदिर में भी जाती हैं, मस्जिद में भी आती हैं, कभी फुरसत से चर्च की घंटी भी बजाती हैं, ओ मजहब के पहरेदारों! … Continue reading आसां कहाँ है ?

है ये ज़िंदगी

ज़िन्दगी क्या है, किस लिए है? वास्तव में यह कोई समझ नहीं पाया। हर शख्स इसे अपने अनुसार जीना चाहे, पर कांटों से भरी पड़ी है जिंदगी की राह, बावजूद इसके कभी न कम होगी जीने की चाह। कभी ठोकरें खाई, उदास हुए कभी सफलता मिली तो मुस्कराए । हर पल बदलती रही यह जिंदगी, … Continue reading है ये ज़िंदगी

श्वेत प्रेम

सहर्ष स्वीकार्य है मुझे तेरा प्रेम, अगर वो श्वेत हो ! सहर्ष स्वीकार्य हैं मुझे तेरे विचार, अगर वे श्वेत हों ! अगर आप पूछोगे कि मुझे श्वेत ही क्यों पसंद है? श्वेत एक रंग नहीं एक स्वछता का भाव है | स्वच्छ विचारों का, स्वच्छ आचरण का समभाव है, मैं रंग भेद नहीं करता … Continue reading श्वेत प्रेम

बूँद की आस

सावन के हैं मौसम पर सूखे हैं खेत सारे बादल को देख आ रहे, आँखों में ही पानी सारे किसकी करूँ पूजा ? किसे दूँ मैं दुहाई ? खुदा ही आज तो कर रहा है रुसवाई क्या हुई भूल हमसे, जो बरसा रहा ऐसा कहर ? देख के लगता है अब बस चाहिए खाने को … Continue reading बूँद की आस