बिटिया की पाती:माँ के नाम

माँ, कल मैं अलमारी साफ कर रही थी । हाँ, कर लेती हूँ अब,आप जो नहीं हैं मेरे पास। अलमारी में उमड़े तूफ़ान से लड़ते लड़ते थक कर सुस्ताने बैठी तो आप ही जेहन में थीं।कितना आसान था सबकुछ, सारी उधेड़बुन से निकलना ,चाहे वो अलमारी की बात हो या मुश्किलों की... और न जाने … Continue reading बिटिया की पाती:माँ के नाम

तुम गए नहीं

उस आखिरी शाम, ‌तुम्हारी उंगलियाँ मेरे पसीने से नम हाथों से ‌फिसल तो गईं ‌लेकिन, ‌तुम गए नहीं। ‌ तुम्हारी कमीज का वो बटन , ‌हर सवेरे जो कमजोर हो टूट जाता था, ‌आखिरी दफा ‌पक्के धागे से सिलकर ‌चला गया था, ‌लेकिन , ‌तुम गए नहीं। ‌ ‌सदियों से मेज पर सजती दो प्यालियाँ … Continue reading तुम गए नहीं

The journey from the ambience of gadgets to the world of words.

“Follow your own passion—not your parents’, not your teachers’—yours.” —Robert Ballard In our country, it's not an easy advice to follow. You need to have a lot of conviction to ward-off the pressure of expectations of parents and society as a whole.And to leave engineering and don the hat of writer is almost unheard of.So, … Continue reading The journey from the ambience of gadgets to the world of words.

Experiences

Winding up the experiences Of a part of my day, Convincing myself to believe. Once, I was a part of. Dilemma evolves Which one to choose!! Whether to enjoy present moments Or To write some moments. Looked into a diary.. Staying in the present I enjoyed the past, Remembered the journey Full of undulations!! When … Continue reading Experiences

होली 

सुबह-सुबह कोलाहल की वजह से नींद थोड़ी टूट गई। अभी तो छह भी नहीं बजे थे। मीठे स्वप्नों को हौले-हौले अलविदा कह ही रही थी कि रसोईघर की दीवारों को लांघती सोंधी-सी...कुछ अपनी-सी खुशबू मन में समाने लगी। अहा! ...गुझिया! होली!! हमारी...तुम्हारी...हम सबकी...पसंदीदा होली। ऐसा त्योहार जो ज़िन्दगी की सम्पूर्णता को खुद में समेटे हुए … Continue reading होली 

आगाज़-ए-सफ़र

कई सवाल थे, सदियों से किसी के शोषण की हज़ारों अनकही बेड़ियों में जकड़ी हर उस नारी के अंतर्मन में, जिसने तीन रुप से प्रहार करते हुए एक ही शब्द को सुना, तीन बार और क्षण मात्र में खो दिया, अपना संसार । बिखर गया था उसका जीवन। हर दिन कोसा है उसने, ऐसे संविधान के … Continue reading आगाज़-ए-सफ़र