हूल..

जब, कसने लगी थी वो शासन की जंजीर गोलियों से भिड़ गए आदिवासियों के तीर ।। "आदिवासी अन्याय सहेंगे" अंग्रेजों की ये भूल थी और वहीं से फूट पड़ी प्रथम रश्मियाँ हूल की ।। जंगल-जंगल सभी ओर बस यही सुनाई देता था "अंग्रेजों ! बहुत हुआ" पत्ता-पत्ता कह देता था ।। सिद्धो-कान्हो ने तीर से … Continue reading हूल..

विश्व पर्यावरण दिवस

नीली फ़ाइल फिर से खिड़की पर आयी वह चिड़िया, देखा उसे मैंने आँखें हटाने के बाद नीली फाइल से। धूप का एक टुकड़ा रोशनदान से छनता ठहर गया अलमारी के उसी कोने में जहाँ मैं नीली फाइल रखता हूँ। बारिश की कुछ छींटें खिड़की से कूदकर, कल दोपहर ही तो मेज़ तक सरक आयीं, पता … Continue reading विश्व पर्यावरण दिवस

माँ, याद तुम्हारी आती है

इस कमरे का एकाकीपन तन्हा है यह मेरा मन इस अंधियारे में तेरी याद यादों के दीप जलाती है, माँ, याद तुम्हारी आती है। पास के छत पर माँ कोई गोद के मुन्ने में खोई, कोमल थपकी दे-देकर जब लोरी कोई सुनाती है, माँ! याद तुम्हारी आती है। जब गर्म तवा छू जाता है हाथ … Continue reading माँ, याद तुम्हारी आती है

28 मई का दिन

यादों के पन्नों को पलटने जा रही हूँ। ज़िन्दगी के उन लम्हों को क्या आसान होगा दोहराना? कोशिश हुई, इन चार सालों को कलमबद्ध करने की, पर चन्द पंक्तियों में सार्थक न हुआ...यह सफ़र... इसलिये कल्पना को स्याही में समेट रही हूँ, एक पल ठहरना मेरे संग, तुम भी और सोचना वो 28 मई का … Continue reading 28 मई का दिन