रक़ीब

साहिलों से दूर, तूफ़ानों में आ गयामंज़िल का मुसाफ़िर, महफ़िल में आ गया चिलमन हटाने आज वो आए हैंइस प्यासे के पास कैसे कुआँ आ गया शराब तो मुझे चढ़ती ही नहींवो तो तुम सामने थे तो नशा आ गया सितारों के सुकून में ख़लल पड़ गयाचॉंद जो आज मेरे हुजरे में आ गया तासीर … Continue reading रक़ीब

हिंदी

श्रीमुख मंगल आदिदेव का जन-गण-मन के नायक जो करें वंदना सत्कर्मों से इस त्रिगुणी के हैं भावक जो वह श्रीमुख ही हिन्दी है इस को नमन करें हम ।। शीश नवा हम श्रीगणेश को उस भुव्यादिशक्तिकायज को शुचिता वाणी में जो बसती ललिता वाणी की कर्त्री को वह ललिता ही हिन्दी है इस को नमन … Continue reading हिंदी

गुरुवर – आप क्या हो?

उन नन्हें कोमल उंगलियों में उलझे वो कलम साफ थे, उस छोटी-सी उलझन को सुलझाने वाले आप थे, गुरुवर वो आप थे। 'अ' अक्षर पर दौड़ते, रहते, लड़खड़ाते कर साफ थे थरथराते हथेलियों को थामने वाले आप थे, गुरुवर वो आप थे। मुख से निकलते वो टूटे-फूटे शब्द साफ थे, पर शब्दों की अहमियत बतलाने … Continue reading गुरुवर – आप क्या हो?