परेशानी

"भैया, तुम जल्दी घर आ जाओ, बाबूजी की तबियत फिर से बिगड़ रही है" ,काँपती हुई आवाज़ में सुधा ने अपने भाई रितेश को बताया।सुन कर रितेश बहुत झुंझला उठा, और प्रत्युत्तर में बस "हूँ" कह कर फ़ोन काट दिया। वह खुद में बुदबुदाने लगा, "इन लोगों ने नौकरी और छुट्टी को मज़ाक समझ रखा … Continue reading परेशानी

आगाज़-ए-सफ़र

कई सवाल थे, सदियों से किसी के शोषण की हज़ारों अनकही बेड़ियों में जकड़ी हर उस नारी के अंतर्मन में, जिसने तीन रुप से प्रहार करते हुए एक ही शब्द को सुना, तीन बार और क्षण मात्र में खो दिया, अपना संसार । बिखर गया था उसका जीवन। हर दिन कोसा है उसने, ऐसे संविधान के … Continue reading आगाज़-ए-सफ़र