बाबा, मेरे उत्तर…

बाबा, कुछ सवाल पूछूँगी। जवाब दोगे ना ? बोलो! दोगे न ? क्यों पहनते हो वही इक कुर्ता होली और दिवाली में ? क्यों सर्दी में नहीं पहनते भैया-से जूते ? क्यों आते हो रात को देरी से ? जबकि शाम तक ही रहता ऑफिस तुम्हारा। क्यों अब स्कूटर से नहीं जाते काम पर, और … Continue reading बाबा, मेरे उत्तर…

राय, तुम यहाँ थे !

​२४ का १४ १० का ९ १५ का ५६ १४ का ३४..... चार साल के कमरों को गिनने के लय में, मैं अपने कॉलेज की आखिरी दिने गिन रहा था। दिन जैसे शून्य में गुज़र रहे थे।। कॉलेज ऐसा नशा बन चुका था, जिसे छोड़ने का मन नही कर रहा था। बी.आई.टी का हर कोना … Continue reading राय, तुम यहाँ थे !

जाना हमें न भूल 

​​ये चिट्ठी नहीं मेरा पैगाम है , मेरे दोस्तों को मेरा सलाम है  । बीत गई जो, वो शाम है ...ठहाकों की वो रातें , याद आती वो बिन लॉजिक वाली बातें... कोई क्लास के लिए चप्पले घिसता था कोई रूम में पेन से कॉपियों पे चीसता था, ओपीनियंस इतने अलग होने के बाद भी … Continue reading जाना हमें न भूल