हूल..

जब, कसने लगी थी वो शासन की जंजीर गोलियों से भिड़ गए आदिवासियों के तीर ।। "आदिवासी अन्याय सहेंगे" अंग्रेजों की ये भूल थी और वहीं से फूट पड़ी प्रथम रश्मियाँ हूल की ।। जंगल-जंगल सभी ओर बस यही सुनाई देता था "अंग्रेजों ! बहुत हुआ" पत्ता-पत्ता कह देता था ।। सिद्धो-कान्हो ने तीर से … Continue reading हूल..

विश्व पर्यावरण दिवस

नीली फ़ाइल फिर से खिड़की पर आयी वह चिड़िया, देखा उसे मैंने आँखें हटाने के बाद नीली फाइल से। धूप का एक टुकड़ा रोशनदान से छनता ठहर गया अलमारी के उसी कोने में जहाँ मैं नीली फाइल रखता हूँ। बारिश की कुछ छींटें खिड़की से कूदकर, कल दोपहर ही तो मेज़ तक सरक आयीं, पता … Continue reading विश्व पर्यावरण दिवस