दंश-उत्सव

संगीत जीवन का बजता है चारों ओर, जीने का उल्लास बिखेरती है माँदर की थाप, आदिम संस्कृति का यह उद्घोष में पहचान है आदिवासी मानुष की । रंग-बिरंगी भूषा में, नृत्य की लयकारी, जैसे धरती भी थिरकती हो, अपनी सबसे प्रिय संतानो के सँग मगर हो सकता है यह सबकुछ बस एक ज़रिया हो, भूल … Continue reading दंश-उत्सव

धनबाद जल प्रबंधन: चुनौती, महत्त्व और तरीके।

निर्मलम् एवं संपादनीयम् जल संरक्षणम् अनिवार्यम्। जन्तूनां सुख जीवनं हेतु जलस्य रक्षणं नूनं भवतु। जल जीवन का आधार है। परंतु आज के समय में संपूर्ण विश्व जल की समस्या से जूझ रहा है। यदि वर्तमान समय में जल संरक्षण के क्षेत्र में कदम नहीं उठाए गए, जल को बूँद-बूँद कर नहीं संरक्षित किया गया, तो … Continue reading धनबाद जल प्रबंधन: चुनौती, महत्त्व और तरीके।

हूल..

जब, कसने लगी थी वो शासन की जंजीर गोलियों से भिड़ गए आदिवासियों के तीर ।। "आदिवासी अन्याय सहेंगे" अंग्रेजों की ये भूल थी और वहीं से फूट पड़ी प्रथम रश्मियाँ हूल की ।। जंगल-जंगल सभी ओर बस यही सुनाई देता था "अंग्रेजों ! बहुत हुआ" पत्ता-पत्ता कह देता था ।। सिद्धो-कान्हो ने तीर से … Continue reading हूल..