And he took the one less traveled by : Vaibhav Kumar

With the days remaining for the most competitive management entrance exam in the nation countable on fingertips, here's a colloquy with the maestro who aced the dread last year with flying colors. Take a break from your rigorous preparations and go through the interview of Vaibhav Kumar Sir, Mechanical Engineering (2k15-2k19) whose fruits of labor … Continue reading And he took the one less traveled by : Vaibhav Kumar

बेबसी

दरवाजे के चौखट पर खड़ी थी लड़की देख रही थी बड़े ध्यान से पथ को, उस पथ को जिस पर कुछ क्षण पहले ही गए थे उसके पिता दूर परदेस। आँखों में आंसू थे, कह रही थी अपनी व्यथा नींद नहीं थी, उन आँखों में रात भर गुड़िया सोई नहीं। इस उम्र में है क्या परेशानी? … Continue reading बेबसी

मैं औरत हूँ

​ न बेटी बोलते ​वक़्त तुम्हारी जुबान लड़खड़ाएगी​, न मेरी जिस्म ​टटोलने ​में तुम्हें लाज ​आएगी ​, वो हादसा ​याद ​करके ​मेरी रूह काँप जाएगी पर बगावत ​में बढ़ते कदम ​रुक जाएंगे। क्योंकि घर ​की इज़्ज़त जो ​हूँ मैं! आगे आयी ​तो ​कुचल दी जाऊँगी। नियत तुम्हारी खराब होती ​जाएगी​ , पल्लू मेरा संभलता जाएगा​ … Continue reading मैं औरत हूँ

नारी-एक कहानी

मैं नारी हूँ। सदियों पहले बनाई गई एक आकृति हूँ, जन्नत से जगत को दिया गया एक नायाब तोहफा हूँ, ईश्वर के हाथ की कलाकृति हूँ। सदियों की जुबानी हूँ। मैं नारी हूँ। मैं जन्म लेती हूँ, धरा पर कदम रखने से पहले, मार दी जाती हूँ। कदम रख भी लिया तो, ताने, दुख, दर्द, … Continue reading नारी-एक कहानी

पहली झलक के किस्से

आंखे फकत ढूंढती रहती इश्क हर गलियारों में, चार दिवारी घुट कर रहती बन्द एक आशियाने में। मुस्कुराकर वो तालीम दे गई हरकते हमारी देख कर, इश्क रश्म समझा हमने आशिक-परवानों को भेट कर। आंखो में नुर झलकती जैसे ईद की मेहताब है, लफ्ज़ होठो से निकलते जैसे शरबती शराब है। किस्मत की शाम को … Continue reading पहली झलक के किस्से

प्यारा डोलू

जब से मैंने होश संभाला है, तब से मैंने अपने घर में गाय, कबूतर, तोते, कुत्ते आदि जानवरों को घर के सदस्यों की तरह देखा है। मेरे घर के सभी लोग पशु-प्रेमी हैं, उन्हें घर के सदस्यों की तरह रखते हैं। गाय तो हमारे घर में शुरू से ही थी,जिसकी देखभाल मेरे दादा, पापा और … Continue reading प्यारा डोलू