A year ago, just scattered dreams,Unsure thoughts and silent streams. Then came a chapter with ink-stained hands, Sarjana rose where passion stands.Some wrote of love, some wrote of pain,Some danced with metaphors in the rain. Every voice, both loud and small,Found a home within those E-54 walls.One year of verses, laughter and thoughtful tears,Of open … Continue reading SARJANA
कुछ भाव ऐसे होते हैं जिन्हें समय भी बदल नहीं पाता। लालच, काम, क्रोध, ईर्ष्या, प्रेम और करुणा का प्रभाव आज जितना है, उतना ही पहले भी था। यही कारण है कि मुंशी प्रेमचंद की रचनाएँ आज के पाठकों में भी प्रचलित हैं। उनकी ‘गोदान’ और ‘निर्मला’ हर साहित्य-प्रेमी की पाठ्य-श्रृंखला का हिस्सा हैं। उनके … Continue reading “सत्ता और नवचेतना का संघर्ष: प्रेमाश्रम”
“What lies behind us and what lies before us are tiny matters compared to what lies within us.” -Ralph Waldo Change is the only constant in life. As 2026 unfolds, we find ourselves at a quiet turning point. A new year does not erase the past; rather, it carries the past forward, reminding us to … Continue reading Whispering Dreams Into 2026
हमारा यह भारतवर्ष त्योहारों का देश है, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। त्योहार सिर्फ संस्कृति और परंपरा का प्रदर्शन मात्र नहीं अपितु हमारे जीवन शैली का एक अभिन्न अंग हैं, जिनका उद्देश्य आम जन मानस के जीवन में आनंद एवं उल्लास का रंग भरना है। ये त्योहार सीखने का अवसर प्रदान … Continue reading विजयादशमी
तलाश रहा हूं, सभी कोलाहलों से दूर, नितांत शांत स्थलों पर, पक्के सड़कों से दूर, कच्ची पगडंडियों पर। दुर्गम पर्वतों के शिखरों पर, अरुणोदय की लालिमा में, घटाओं की कालीमा में। पर्वतों के गर्भ में, धारा के आघात से उत्पन्न झरनों की कलनाद के मध्य। घने वनों के मध्य, घोंसले से झांक रहे विहंगों की … Continue reading तलाश
प्रिय, तुम मेरी प्राथमिकता थी, सम्भवतः मैं तुम्हारा विकल्प। तुम उद्यान की वह पुष्प थी, जिसके सम्मुख, सबकी सुंदरता थी अल्प।। मैं नहीं देना चाहता था तुम्हें श्रृंगार की वस्तुएँ, मैं तो चाहता था… तुम्हें कालिदास की मेघदूतम सुनाऊँ। वह मेघ बन बरस जाऊँ, जिसके सम्मुख यक्ष ने बहाए थे अश्रु विरह में।। ले चलूं … Continue reading प्रिय!
