प्यारा डोलू

जब से मैंने होश संभाला है, तब से मैं अपने घर में गाय, कबूतर, तोता, कुत्ता आदि जानवरों को घर के सदस्य की तरह देखा है। मेरे घर के सभी लोग पशु-प्रेमी हैं, उन्हें घर के सदस्य की तरह रखते है। गाय तो हमारे घर में शुरू से ही थी, जिनकी देखभाल मेरे दादा, पापा … Continue reading प्यारा डोलू

हर दुर्गा की पूजा

दुर्गा का रूप है वो, शक्ति का स्रोत है गंगा-सी पवित्र है वो, निर्मल निर्दोष है हर पल सवालों से घिरी, संयम की मूर्ति हर दर्द जो हँस कर सह ले, ऐसे प्यार की आकृति। एक औरत का है हर रूप निराला, बेटी से माँ बन कर है जिसने पूरे परिवार को सँभाला। आखिर कबतक उसे नीचा … Continue reading हर दुर्गा की पूजा

आँखों की आँख-मिचौली

ये आँखें, ये नयन और न जाने क्या-क्या, कभी ये इतनी बार झपकती है कि जिसका इंतज़ार रहता है, जिस खुशी का, वह एक ही बार में पा जाते हैं। कभी यह ऐसा खेल खेलती है कि चाहते हुए भी झपकती नहीं। टकटकी लगाए हुए ये निगाहें उस रास्ते की तरफ़ देखते रहती है। कभी … Continue reading आँखों की आँख-मिचौली

न जाने कितनों का हाथ वही

निर्मम सिमट सिकुड़ वह सोया था, अँधेरे चौराहेे की चौखट पर वह खोया था। चादर ओढ़े सिर छिपाए, पाँव फिर भी निकले थे, सनसनाती हवा चली, पैरों को छू, निकली थी। काँप गए बदन मेरे देख वह एहसास, क्या बीती होगी उस पर जब टूटे होंगे जज़्बात? मन न माना, जी मचल उठा पूछने को … Continue reading न जाने कितनों का हाथ वही

माँ का लाल

जंग के मैदान में लाल था, बेचारी माँ का हाल बेहाल था। उसकी एक झलक को तड़पती पर लाल पर देश की रक्षा का भार था। माँ का दर्द हवाओं ने उस तक पहुँचाया, "कैसा निर्मोही है तू!" उन फिज़ाओं ने उसके कानों में बुदबुदाया। नम तो उसकी भी आँखें थी, उसने भी अपना दुखड़ा … Continue reading माँ का लाल