बूँद की आस

सावन के हैं मौसम पर सूखे हैं खेत सारे बादल को देख आ रहे, आँखों में ही पानी सारे किसकी करूँ पूजा ? किसे दूँ मैं दुहाई ? खुदा ही आज तो कर रहा है रुसवाई क्या हुई भूल हमसे, जो बरसा रहा ऐसा कहर ? देख के लगता है अब बस चाहिए खाने को … Continue reading बूँद की आस

अर्पण या तर्पण

खड़े हो फल्गु की रेत पर देने को मुझे तर्पण माँग रहे हो पित्र शान्ति देकर मुझे रेत की अर्पण पर यह सब कुछ तो व्यर्थ ही होगा और झूठे दिखावे ना मुझे मोक्ष देगा। पर जब हम धरती पर थे पाले रहते तुझसे आस मिले हमें  तुम्हारा सुख जो बने बुढ़ापे की लाठी काश। … Continue reading अर्पण या तर्पण

मैं और लोग

मैं अक्सर लोगों के सामने खुली किताब की तरह खुद को फेंक देता हूँ लोग कुछ पन्ने पढ़ लेते हैं कुछ पन्ने फाड़ देते हैं और लोग,मेरे पास होते हैं स्टॉल पर रखी उस महंगे किताब की तरह जो चमकती जिल्द में पैक है जिस के पन्ने मैं पलट नहीं सकता बस,कवर के पीछे इंटरेस्ट … Continue reading मैं और लोग

क्यों हो गए हो जीवन से निराश, क्यों छोड़ बैठे हो मंज़िल पाने की आस । माना की तेरी राह में मुश्किलें तमाम होंगी, कई बार तेरी कोशिशें भी नाकाम होंगी। मुश्किलों से डर कर कभी रुक मत जाना, कठिनाईयों के आगे कभी झुक मत जाना। हौसला रख और आगे बढ़, मंज़िल तू पा जाएगा। … Continue reading

अधूरे सपने

आँखों में बसा एक ख्वाब लेकर आयी हूँ, जीवन में अपने कुछ खास करने आयी हूँ, आप लोगों की इनायत सही रही तो, इतिहास में दर्ज करवाने अपना नाम आयी हूँ। क्या बताऊँ इस दुनिया की हालत, यहाँ तो मुख़्तलिफ़ लोगों  का ही बसेरा है, जहाँ मैंअपना ख्वाब पूरा करने आयी, यहाँ तो इंसानियत नहीं, हैवानियत का लगा … Continue reading अधूरे सपने

स्त्री का सम्मान

"आज भी महारानी देर से आएगी" गुस्से से रितु मैडम तमतमा रहीं थी। उनके यहाँ काम करने वाली सरला पिछले दो दिनों से देर से आ रही थी, जिसकी वजह से उनकी अति व्यस्त दिनचर्या गड़बड़ा रही थी। सरला जैसे ही आयी, रितु मैडम बरस पड़ी उसपर।" मज़ाक समझ के रखा है क्या काम को … Continue reading स्त्री का सम्मान