अलविदा कहना पड़ रहा

कॉलेज की इन सड़कों को देख, कुछ यादें याद आती है, कही-अनकही हज़ारों बातें याद आती है, नादानी में की गई कुछ गुस्ताखियाँ, ये बचपन से जवानी की ओर बढ़ते कदमों की हर निशानी याद आती है। तो चलो लेतें है हम भी एक प्यारी सी सवारी , जिसमें बसी है मेरे यादों की एक … Continue reading अलविदा कहना पड़ रहा

Embrace the New Beginning

“Apocalypse will eradicate humanity in 2012“– they said. Then we, the survivors are entering the 7th year post apparent annihilation. The year 2018 is about to culminate and a New Year imbued with hopes, resolutions and checklists is approaching us. 2018 made us witness some hilarious crossovers, epic memes, bizarre social media trends, historic Supreme … Continue reading Embrace the New Beginning

तुम भी रह गए बापू,दिल्ली के ही होकर

बापू के जन्म दिवस पर, राजधानी दिल्ली के राजघाट पहुँचने के लिए उद्वेलन भरा किसान आन्दोलन। प्रस्तुत कविता में उन अन्नदाता किसान पुत्रों के मन की पीड़ा को मरहम का उपहार दिलाने के उद्देश्य से ही किसी महात्मा के जन्म दिवस की छायावादी अंदाज में व्याख्या हुई है, जो आज की ताजी खबर होगी । … Continue reading तुम भी रह गए बापू,दिल्ली के ही होकर

How pertinent was Anti-Padmavat Movement?

  Public perception is that the karni sena has destroyed our HISTORY TEACHER BHANSALI’s magnum opus Padmavat which could've resulted in him being bankrupt. Pity! Poor chaps.They are oblivious of the maneuver of the glamour world. Self-proclaimed defenders of Rajputana Shaan have given everyone some kaarans to rejoice. The government is happy due to actual … Continue reading How pertinent was Anti-Padmavat Movement?

सीरिया: मनुष्य और मनुष्यता पर एक नज़र

आपकी भावनाएँ आपके विचारों की दासी हैं, और आप अपनी भावनाओं के दास हैं। ~एलिज़ाबेथ गिल्बर्ट   "मनुष्य सबसे संवेदनशील प्राणी है" ऐसा कहा जाता है। गौर करने की बात है कि यह कहता भी मनुष्य ही है; हम और आप। आज दुनिया में गंभीर हालात हैं। इसका कारण मनुष्य ही है, या यह कह … Continue reading सीरिया: मनुष्य और मनुष्यता पर एक नज़र