पराई बेटी

लिपट तेरे दामन से वो बिटिया यूँ रोने लगी कल तक तेरी परछाई कहने वाली, खुद को पराई कहने लगी खोल तेरा ओढ़ आई एक गुड़िया बासी-सी यादें वो उसकी, आज मेरे अल्फाज़ों में बहने लगी… दर्पण आँखों की तेरी, से खुद को सजाया करती है कभी आँगन में बैठ तेरे जुड़े बनाया करती है … Continue reading पराई बेटी

वो न मिला

हर ज़फर में ढूँढा, सफर में  ढूँढा  इब्तिला में ढूँढा, इब्तिसाम में ढूँढा आफताब में ढूँढा, माहताब मे ढूँढा ढूँढा दर-दर उसे, वो न मिला।।   उसके शब में डूबा, शबाब मे डूबा इल्म में डूबा, इतिबार मे डूबा तस्वीर में डूबा, तसव्वुर मे डूबा डूबा गहराईयों में उसके, वो न मिला।। हर ज़ार में … Continue reading वो न मिला

अस्तित्व सवाल करता है

कुछ इठला कर, एक बच्चे की तरह अभिमान भरी आँखों से, एक बूढ़े शेर की तरह व्यंग्य करता है; मेरा अस्तित्व मुझसे सवाल करता है।   रोज़ आईने में दिखती है एक धुंधली तस्वीर धूल जम गई है शायद मैं नहीं हूँ... मुझ पर हँसता है; मेरा अस्तित्व मुझसे सवाल करता है।   कौन हो … Continue reading अस्तित्व सवाल करता है