आँखों में बसा एक ख्वाब लेकर आयी हूँ, जीवन में अपने कुछ खास करने आयी हूँ, आप लोगों की इनायत सही रही तो, इतिहास में दर्ज करवाने अपना नाम आयी हूँ। क्या बताऊँ इस दुनिया की हालत, यहाँ तो मुख़्तलिफ़ लोगों का ही बसेरा है, जहाँ मैंअपना ख्वाब पूरा करने आयी, यहाँ तो इंसानियत नहीं, हैवानियत का लगा … Continue reading अधूरे सपने
"आज भी महारानी देर से आएगी" गुस्से से रितु मैडम तमतमा रहीं थी। उनके यहाँ काम करने वाली सरला पिछले दो दिनों से देर से आ रही थी, जिसकी वजह से उनकी अति व्यस्त दिनचर्या गड़बड़ा रही थी। सरला जैसे ही आयी, रितु मैडम बरस पड़ी उसपर।" मज़ाक समझ के रखा है क्या काम को … Continue reading स्त्री का सम्मान
"भैया, तुम जल्दी घर आ जाओ, बाबूजी की तबियत फिर से बिगड़ रही है" ,काँपती हुई आवाज़ में सुधा ने अपने भाई रितेश को बताया।सुन कर रितेश बहुत झुंझला उठा, और प्रत्युत्तर में बस "हूँ" कह कर फ़ोन काट दिया। वह खुद में बुदबुदाने लगा, "इन लोगों ने नौकरी और छुट्टी को मज़ाक समझ रखा … Continue reading परेशानी
पूर्ण चेतना में प्रिय हुआ आखिरी मिलन! ग्रह नक्षत्रों का कोई विशिष्ट संयोग न था किसी अलौकिक शक्ति से प्रेरित समानांतर कल का योग न था दो स्वच्छ, पवित्र पुलकित हृदय ने, स्वेच्छा से स्वभाग दिया पवित्रता की परम कसौटी का दो हृदय ने आभास किया। पुनर्विदित था दोनों को यह आखिरी स्पर्श होगा साँसों … Continue reading आखिरी मिलन
कुछ विचार कौंधे खाली पड़े दिमाग में सोचा क्यूँ ना कविता का रूप दूँ इसे, आवाज लगाई हिंदी को काफी ढूँढा जाकर मिली सुनसान खंडहर में खटिया डाल पसरी हुई थी कोने में, क़दमों की आहट से घबराकर जाग उठी हैरान मैं, पूछ बैठा यूँ निट्ठली क्यूँ पड़ी हो? बौखला उठी हिंदी, रास नहीं आया … Continue reading हिन्दी की कलम से…
It is every man's obligation to put back into the world at least the equivalent of what he takes out of it. Albert Einstein We Indians, especially engineers have always been chastised for being money-centric. It's our avaricious nature that leads us to non-core sectors such as banking etc after 4 years of technical education or … Continue reading A story of tenacity: INTERVIEW WITH SAJID HUSSAIN
