हिन्दी की कलम से…

कुछ विचार कौंधे खाली पड़े दिमाग में सोचा क्यूँ ना कविता का रूप दूँ इसे, आवाज लगाई हिंदी को काफी ढूँढा जाकर मिली सुनसान खंडहर में खटिया डाल पसरी हुई थी कोने में, क़दमों की आहट से घबराकर जाग उठी हैरान मैं, पूछ बैठा यूँ निट्ठली क्यूँ पड़ी हो? बौखला उठी हिंदी, रास नहीं आया … Continue reading हिन्दी की कलम से…