निर्मम सिमट सिकुड़ वह सोया था, अँधेरे चौराहेे की चौखट पर वह खोया था। चादर ओढ़े सिर छिपाए, पाँव फिर भी निकले थे, सनसनाती हवा चली, पैरों को छू, निकली थी। काँप गए बदन मेरे देख वह एहसास, क्या बीती होगी उस पर जब टूटे होंगे जज़्बात? मन न माना, जी मचल उठा पूछने को … Continue reading न जाने कितनों का हाथ वही
Category: Literary
जंग के मैदान में लाल था, बेचारी माँ का हाल बेहाल था। उसकी एक झलक को तड़पती पर लाल पर देश की रक्षा का भार था। माँ का दर्द हवाओं ने उस तक पहुँचाया, "कैसा निर्मोही है तू!" उन फिज़ाओं ने उसके कानों में बुदबुदाया। नम तो उसकी भी आँखें थी, उसने भी अपना दुखड़ा … Continue reading माँ का लाल
श्रीमुख मंगल आदिदेव का जन-गण-मन के नायक जो करें वंदना सत्कर्मों से इस त्रिगुणी के हैं भावक जो वह श्रीमुख ही हिन्दी है इस को नमन करें हम ।। शीश नवा हम श्रीगणेश को उस भुव्यादिशक्तिकायज को शुचिता वाणी में जो बसती ललिता वाणी की कर्त्री को वह ललिता ही हिन्दी है इस को नमन … Continue reading हिंदी
उन नन्हें कोमल उंगलियों में उलझे वो कलम साफ थे, उस छोटी-सी उलझन को सुलझाने वाले आप थे, गुरुवर वो आप थे। 'अ' अक्षर पर दौड़ते, रहते, लड़खड़ाते कर साफ थे थरथराते हथेलियों को थामने वाले आप थे, गुरुवर वो आप थे। मुख से निकलते वो टूटे-फूटे शब्द साफ थे, पर शब्दों की अहमियत बतलाने … Continue reading गुरुवर – आप क्या हो?
“Wake up you sleepyhead! I’m not going to wait for eternity, you know.” “But why? Let me sleep a little bit more.” “WHY? YOU NINCOMPOOP! It’s rakshabandhan today and I won’t be allowed to eat until I tie the rakhi on your hands. And for how long do you intend to sleep, you sloth? It’s … Continue reading CHAINS OF LOVE
संगीत जीवन का बजता है चारों ओर, जीने का उल्लास बिखेरती है माँदर की थाप, आदिम संस्कृति का यह उद्घोष में पहचान है आदिवासी मानुष की । रंग-बिरंगी भूषा में, नृत्य की लयकारी, जैसे धरती भी थिरकती हो, अपनी सबसे प्रिय संतानो के सँग मगर हो सकता है यह सबकुछ बस एक ज़रिया हो, भूल … Continue reading दंश-उत्सव
