आवाज़ देकर देख लो

निकल पड़े हैं कमरे से कोई आवाज़ देकर देख लो निकालो खाता चार सालों का हिसाब लगा कर देख लो.. पहले पन्ने पर यारी होगी दूजे में कोई प्यार मिलेगा तीसरे पर कुछ होंगे सपने चौथे में खरीदार मिलेगा क्या पाया और क्या खोया अब तक हिसाब लगाकर देख लो निकल पड़े हैं कमरे से … Continue reading आवाज़ देकर देख लो

बिछड़ जाएँगे…..पर मिलने के बाद

IIT और NIT के सदमे के मार ने, ला फेंका हमें BIT के द्वार पे। जिस जंगल में आना ना चाहते थे कोई अपने घर द्वार से, रो रहे है आज, सब उसी जंगल के प्यार में। 1st Year हर किसी के मन में होता था रैगिंग का डर, सोचते थे, कब मौका मिले और … Continue reading बिछड़ जाएँगे…..पर मिलने के बाद

मिलन की अभिलाषा

मैं तुमसे मिलना चाहती हूँ।उसी गहरे सागर के तल में,जहाँ तुम्हारी काया धीरे-धीरेअब पानी में विलीन हो रही होगी। उस शिल्पकार कीमहीनों की मेहनत भीअब तुम्हारा कलेवर छोड़अपना अस्तित्व खो रही होगी। काले, घुंघराले मेघों-सेतुम्हारे लम्बे केश भीअब दूब की भाँतिअसीम, फैल गए होंगे। शायद,छोटी-छोटी मछलियाँउन दूब के इर्द-गिर्दअटखेलियाँ कर रही होंगी। हाँ, कहते हैं … Continue reading मिलन की अभिलाषा

तुम गए कब?

नयनों से बूँदे छलक रही हैं और तुम अश्रुओं की सीढ़ियाँ चढ़कर नैनों से उर में समा रहे हो। सब कहते हैं- तुम जा रहे हो। पर मैं कहती हूँ- तुम आ रहे हो। बीत गए रैन कई, भोर भी देखे कई, मौसम भी बदले और साल भी गुज़रे कई। शीतल बह रही बयार है, … Continue reading तुम गए कब?

शौर्यगाथा

मैं खुशकिस्मत था, जो लला था, कृष्ण कन्हैया सा, दो माँओं का लाडला, एक का सूरज दूजे का चाँद-दुलारा। एक माँ ने जन्म दिया, फ़ौलादों-सा जिगर और हौसला बुलंद दिया, पर दूजी की सेवा को मुझे खुद से ही दूर किया। एक माँ की रक्षा करने को सरसों के खेतों से, गलियों और चौराहों से, … Continue reading शौर्यगाथा