आँखों की आँख-मिचौली

ये आँखें, ये नयन और न जाने क्या-क्या, कभी ये इतनी बार झपकती है कि जिसका इंतज़ार रहता है, जिस खुशी का, वह एक ही बार में पा जाते हैं। कभी यह ऐसा खेल खेलती है कि चाहते हुए भी झपकती नहीं। टकटकी लगाए हुए ये निगाहें उस रास्ते की तरफ़ देखते रहती है। कभी … Continue reading आँखों की आँख-मिचौली

न जाने कितनों का हाथ वही

निर्मम सिमट सिकुड़ वह सोया था, अँधेरे चौराहेे की चौखट पर वह खोया था। चादर ओढ़े सिर छिपाए, पाँव फिर भी निकले थे, सनसनाती हवा चली, पैरों को छू, निकली थी। काँप गए बदन मेरे देख वह एहसास, क्या बीती होगी उस पर जब टूटे होंगे जज़्बात? मन न माना, जी मचल उठा पूछने को … Continue reading न जाने कितनों का हाथ वही

माँ का लाल

जंग के मैदान में लाल था, बेचारी माँ का हाल बेहाल था। उसकी एक झलक को तड़पती पर लाल पर देश की रक्षा का भार था। माँ का दर्द हवाओं ने उस तक पहुँचाया, "कैसा निर्मोही है तू!" उन फिज़ाओं ने उसके कानों में बुदबुदाया। नम तो उसकी भी आँखें थी, उसने भी अपना दुखड़ा … Continue reading माँ का लाल

हिंदी

श्रीमुख मंगल आदिदेव का जन-गण-मन के नायक जो करें वंदना सत्कर्मों से इस त्रिगुणी के हैं भावक जो वह श्रीमुख ही हिन्दी है इस को नमन करें हम ।। शीश नवा हम श्रीगणेश को उस भुव्यादिशक्तिकायज को शुचिता वाणी में जो बसती ललिता वाणी की कर्त्री को वह ललिता ही हिन्दी है इस को नमन … Continue reading हिंदी

गुरुवर – आप क्या हो?

उन नन्हें कोमल उंगलियों में उलझे वो कलम साफ थे, उस छोटी-सी उलझन को सुलझाने वाले आप थे, गुरुवर वो आप थे। 'अ' अक्षर पर दौड़ते, रहते, लड़खड़ाते कर साफ थे थरथराते हथेलियों को थामने वाले आप थे, गुरुवर वो आप थे। मुख से निकलते वो टूटे-फूटे शब्द साफ थे, पर शब्दों की अहमियत बतलाने … Continue reading गुरुवर – आप क्या हो?