कुल-गीत

भारत को बढ़ाने के लिए, विद्या फैलाने के लिए '४९ में जन्मा बी आई टी, ज्ञान फैलाने के लिए || भारत को बढ़ाने के लिए, विद्या फैलाने के लिए, हर प्रांत से आते हैं, सब युवा यह निश्चय लिए, बी.आई.टी में सीखें कर्म, भारत को बढ़ाने के लिए || चारों ओर करें कर्म हम, होगा … Continue reading कुल-गीत

दीनता का दंश

असंतुलन समाज का फिर, नयनों के द्वार खोल रहा है जहाँ भी देखूँ , दीनता का कोई मोल रहा है हो हृदय दर्द से विचलित,खुद को टटोल रहा है, इसलिए मेरा अशांत मन चीख-चीख कर बोल रहा है, खुश है वे जिनके थाली में छप्पन भोग बरसता है। हाथें है घृत भरी और भोजन से … Continue reading दीनता का दंश

दीये जलाएं…

कंठ खोल ,सुर नही, स्वर की गति को थामा हैं। उल्लास मन कुछ बोल पाए यह उदास मन ने न माना हैं। हर क्षण ये चिर मन के, रंग ही फीके पड़ गए। हम बच्चे ही अच्छे थे, यूँ ही क्यों आगे बढ़ गए। ये काल के कपाल की चाल से, सब रुसवाई है , … Continue reading दीये जलाएं…

आओ मिलकर दीप जलाएं

प्रकाशपर्व की मधुर बेला में आओ मिलकर दीप जलाएं स्नेह-साधना करें अनवरत जग में नव प्रकाश फैलाएँ| आलोकित हो हर घर, आँगन हर घर कुछ यूँ जगमगाए झिलमिल दीपों के क्षण पावन हर्ष का एहसास कराए| जलाएँ दीप चहुँओर आओ, मिलकर सभी आगे आएँ अंत करें तम निशा का रजनी को नव भोर बनाएँ| शुभ-लाभ … Continue reading आओ मिलकर दीप जलाएं

माँ से एक भक्त की अरदास

रावण द्वारा सीता अपहरण से राम के साथ आर्यावर्त की प्रतिष्ठा दाव पर लगी थी ।सागर लाँघ कर लंका पर चढ़ाई करना जब दुष्कर लगने लगा तब माँ की आराधना करते हुए नर-वानर की मैत्री की शक्ति स्थापित हो सकी।।मां चंद्रघंटा बनी कृपामयी। रोको माँ यह अत्याचार तन पर ,मन पर, जन जीवन पर , … Continue reading माँ से एक भक्त की अरदास

शैल पुत्री

माँ शैल पुत्री शैल शिखर से वृषभ यान पर कैसे आ टपकी हो माँ । इन बच्चों के लिए न जाने , कहाँ-कहाँ भटकी हो माँ । जंगल -जंगल ,वन -उपवन में , खोज लिया मुझको निर्जन में, यही सोच कर भूल न जाऊँ , श्वाँस तुम्हारी अटकी माँ ।। इन बच्चों के लिए न … Continue reading शैल पुत्री