क्यों हो गए हो जीवन से निराश, क्यों छोड़ बैठे हो मंज़िल पाने की आस । माना की तेरी राह में मुश्किलें तमाम होंगी, कई बार तेरी कोशिशें भी नाकाम होंगी। मुश्किलों से डर कर कभी रुक मत जाना, कठिनाईयों के आगे कभी झुक मत जाना। हौसला रख और आगे बढ़, मंज़िल तू पा जाएगा। … Continue reading

अधूरे सपने

आँखों में बसा एक ख्वाब लेकर आयी हूँ, जीवन में अपने कुछ खास करने आयी हूँ, आप लोगों की इनायत सही रही तो, इतिहास में दर्ज करवाने अपना नाम आयी हूँ। क्या बताऊँ इस दुनिया की हालत, यहाँ तो मुख़्तलिफ़ लोगों  का ही बसेरा है, जहाँ मैंअपना ख्वाब पूरा करने आयी, यहाँ तो इंसानियत नहीं, हैवानियत का लगा … Continue reading अधूरे सपने

हिन्दी की कलम से…

कुछ विचार कौंधे खाली पड़े दिमाग में सोचा क्यूँ ना कविता का रूप दूँ इसे, आवाज लगाई हिंदी को काफी ढूँढा जाकर मिली सुनसान खंडहर में खटिया डाल पसरी हुई थी कोने में, क़दमों की आहट से घबराकर जाग उठी हैरान मैं, पूछ बैठा यूँ निट्ठली क्यूँ पड़ी हो? बौखला उठी हिंदी, रास नहीं आया … Continue reading हिन्दी की कलम से…

तुम गए नहीं

उस आखिरी शाम, ‌तुम्हारी उंगलियाँ मेरे पसीने से नम हाथों से ‌फिसल तो गईं ‌लेकिन, ‌तुम गए नहीं। ‌ तुम्हारी कमीज का वो बटन , ‌हर सवेरे जो कमजोर हो टूट जाता था, ‌आखिरी दफा ‌पक्के धागे से सिलकर ‌चला गया था, ‌लेकिन , ‌तुम गए नहीं। ‌ ‌सदियों से मेज पर सजती दो प्यालियाँ … Continue reading तुम गए नहीं

आगाज़-ए-सफ़र

कई सवाल थे, सदियों से किसी के शोषण की हज़ारों अनकही बेड़ियों में जकड़ी हर उस नारी के अंतर्मन में, जिसने तीन रुप से प्रहार करते हुए एक ही शब्द को सुना, तीन बार और क्षण मात्र में खो दिया, अपना संसार । बिखर गया था उसका जीवन। हर दिन कोसा है उसने, ऐसे संविधान के … Continue reading आगाज़-ए-सफ़र

गाँधीजी के जन्मदिन पर

मैं फिर जनम लूँगा फिर मैं इसी जगह आऊँगा उचटती निगाहों की भीड़ में अभावों के बीच लोगों की क्षत-विक्षत पीठ सहलाऊँगा लँगड़ाकर चलते हुए पावों को कंधा दूँगा गिरी हुई पद-मर्दित पराजित विवशता को बाँहों में उठाऊँगा ।   इस समूह में इन अनगिनत अचीन्ही आवाज़ों में कैसा दर्द है कोई नहीं सुनता ! पर … Continue reading गाँधीजी के जन्मदिन पर