कॉलेज की इन सड़कों को देख, कुछ यादें याद आती है, कही-अनकही हज़ारों बातें याद आती है, नादानी में की गई कुछ गुस्ताखियाँ, ये बचपन से जवानी की ओर बढ़ते कदमों की हर निशानी याद आती है। तो चलो लेतें है हम भी एक प्यारी सी सवारी , जिसमें बसी है मेरे यादों की एक … Continue reading अलविदा कहना पड़ रहा
Category: Literary
होली आती है, पहले की भाँति तो नहीं लेकिन दिनभर के लिए रह ही जाती है। बाज़ार माह भर पहले से नहीं लेकिन सप्ताह पहले सज ही जाते हैं। और पिताजी दो दिन पूर्व भागदौड़ में सही पकवान की सामग्री ले ही आते हैं। सामग्रियों में अब पिचकारियाँ नहीं रहती। विषाद का विषय है, लेकिन … Continue reading बदलती होली…
जब मुठ्ठियों में रंग भरे हुए, लोग सड़कों पर उतरेंगे आज, तुम आँखें न चुरा लेना, होली तुम भी मना लेना। आज धुल जाएंगे गिले सभी, जब प्यार से मिलेंगे गले सभी, इन बहते हुए रंगों के साथ , शिकवे सभी बहा देना, होली तुम भी मना लेना। इन दीवारों के अंदर, रहते हो साल … Continue reading होली तुम भी मना लेना।
रूप में, श्रृंगार में बात में, व्यवहार में सोच में, विचार में रक्षा में, प्रहार में उपकार में, उपहार में प्रवाह में, धार में हर जीत में, हर हार में कहीं सही, तो कहीं गलत रहा हूँ मैं हाँ, थोड़ा अलग रहा हूँ मैं। कोई बात कैसे मान लूँ, जब तक न सच मैं जान … Continue reading शायद मैं तुम जैसा नहीं।
The chilled dry wind was getting smoother by an inch; the ice on the rooftops were beginning to melt; February was just dusting her shoes off to leave, and a fresh gust of spring was about to fill the frozen souls of Tokyo. A new month, from a far-off land, was about to sell some … Continue reading ALL THAT’S GREEN AND YOUNG MUST CRUMBLE AND YELLOW
भारत को बढ़ाने के लिए, विद्या फैलाने के लिए '४९ में जन्मा बी आई टी, ज्ञान फैलाने के लिए || भारत को बढ़ाने के लिए, विद्या फैलाने के लिए, हर प्रांत से आते हैं, सब युवा यह निश्चय लिए, बी.आई.टी में सीखें कर्म, भारत को बढ़ाने के लिए || चारों ओर करें कर्म हम, होगा … Continue reading कुल-गीत
