जब मुठ्ठियों में रंग भरे हुए,
लोग सड़कों पर उतरेंगे आज,
तुम आँखें न चुरा लेना,
होली तुम भी मना लेना।
आज धुल जाएंगे गिले सभी,
जब प्यार से मिलेंगे गले सभी,
इन बहते हुए रंगों के साथ ,
शिकवे सभी बहा देना,
होली तुम भी मना लेना।
इन दीवारों के अंदर,
रहते हो साल भर,
मौका है आज निकलने का,
काली-सफेद दीवारों को,
थोड़ा रंगीन बना देना,
होली तुम भी मना लेना।
ग से गाने,
ग से गुजिये,
ग से गुलाल लगाना तुम,
शोर-शराबा,
मस्ती -हुड़दंग ,
 सब खूब मचाना तुम,
बच्चे-बड़ों को हँसाकर,
नई उम्मीद जगा लेना,
होली तुम भी मना लेना।
होली तुम भी मना लेना।
-श्वेता सुमन

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