काव्यांजलि

नमन उस अटल को, जो शख्सियत विशाल था मिल गया उस मिट्टी में, जिसका वो लाल था अटल से अटल की लड़ाई थी जीत कर मौत भी इठलाई थी   पराजित अटल, विजेता भी अटल दूसरे में, आखिर कहाँ था बल!   विधि के विधान में, मौत के सम्मान में किया उसने शत-शत नमन छोड़ … Continue reading काव्यांजलि

राय, तुम यहाँ थे !

​२४ का १४ १० का ९ १५ का ५६ १४ का ३४..... चार साल के कमरों को गिनने के लय में, मैं अपने कॉलेज की आखिरी दिने गिन रहा था। दिन जैसे शून्य में गुज़र रहे थे।। कॉलेज ऐसा नशा बन चुका था, जिसे छोड़ने का मन नही कर रहा था। बी.आई.टी का हर कोना … Continue reading राय, तुम यहाँ थे !