राय, तुम यहाँ थे !

​२४ का १४ १० का ९ १५ का ५६ १४ का ३४..... चार साल के कमरों को गिनने के लय में, मैं अपने कॉलेज की आखिरी दिने गिन रहा था। दिन जैसे शून्य में गुज़र रहे थे।। कॉलेज ऐसा नशा बन चुका था, जिसे छोड़ने का मन नही कर रहा था। बी.आई.टी का हर कोना … Continue reading राय, तुम यहाँ थे !

जाना हमें न भूल 

​​ये चिट्ठी नहीं मेरा पैगाम है , मेरे दोस्तों को मेरा सलाम है  । बीत गई जो, वो शाम है ...ठहाकों की वो रातें , याद आती वो बिन लॉजिक वाली बातें... कोई क्लास के लिए चप्पले घिसता था कोई रूम में पेन से कॉपियों पे चीसता था, ओपीनियंस इतने अलग होने के बाद भी … Continue reading जाना हमें न भूल 

तैयारी – एक नई दुनिया की

​पलकें आँसुओं से भीगी थीं, नज़रें उदासी से झुकी थीं । कुछ कहना था अपनों से मुझे आवाज़ मेरी थोड़ी धीमी थी ।। कुछ अपने दरवाज़े पर छूट गए, कुछ अनजाने मेरे साथ चले । अब आँसुओं को खुद पोछना था, साहस बटोर आगे बढ़ना था ।। हॉस्टल में पहला कदम काँपा था, कमरे में … Continue reading तैयारी – एक नई दुनिया की

पहली ‘गुड मॉर्निंग’

पाँव छूने के लिए जो मैंने अपने सिर को झुकाया, तो वापस उसे उठाने की हिम्मत नहीं हो पाई | हॉस्टल के उस गेट के बाहर वह मेरे और मेरे माता-पिता की वियोग की बेला थी | इतने वर्षों में मैं एक क्षण भी अपने माता-पिता से इतनी दूर नहीं हुई और यहाँ अचानक से … Continue reading पहली ‘गुड मॉर्निंग’