गज़ल

जीने में आज भी खूं ये हमारी सलीका रखती हैं, छोटों से प्यार करती हैं बड़ों का मान रखती हैं।।   बड़ी ही शिद्दत से कमाई है हमने ये तालीम, बज़्म-ए-हय़ात आज भी कब्रगाहों को याद करती है।।   शिकन आती नहीं कभी इस चेहरे की शान पर, घर की तरबियत बाहर के फैसलों में … Continue reading गज़ल

शौख़

'शौख़' – यह शब्द सुनने में ही मज़ेदार है। इसके अन्दाज़ भी कुछ इसके नाम जैसे ही निराले हैं। हर इंसान की चाहत होती है कि वो अपने शौख़ पूरे करे। लेकिन मज़े की बात यह है कि इस 'नाचीज़' शब्द ने अपने कुछ नखरें बना रखे हैं। शौख़ पूरे होने से आप असल में … Continue reading शौख़