गज़ल

जीने में आज भी खूं ये हमारी सलीका रखती हैं, छोटों से प्यार करती हैं बड़ों का मान रखती हैं।।   बड़ी ही शिद्दत से कमाई है हमने ये तालीम, बज़्म-ए-हय़ात आज भी कब्रगाहों को याद करती है।।   शिकन आती नहीं कभी इस चेहरे की शान पर, घर की तरबियत बाहर के फैसलों में … Continue reading गज़ल