रेनबो ‘ १७

काल के चाक पर वह चल रही है  और पैरों के तले हर पल रही है थपकियाँ परिवेश की पाकर भी वो तम मिटाने बन दिया निकल रही है   ‘प्रयास’ – एक अत्यंत साधारण-सा शब्द | किन्तु यही जीवन को असाधारण बनाता है | इस साधारण शब्द के आयाम का विस्तार जानना हो तो … Continue reading रेनबो ‘ १७

उपनिषद गंगा

हमारा देश 'भारत' विश्व गुरु रहा है, भारतीय दर्शन का आज भी विश्व में उच्चतम स्थान है और यदि हमें भारतीय मानस को समझना हो तो हमें सर्वप्रथम अपने वाङ्गमय को जानना होगा जिसमें उपनिषद् अनिवार्य है, क्या है उपनिषद्? उपनिषद् स्वयं को पहचानने की यात्रा है क्योंकि उपनिषद् जो दिखाई देता है उसकी बात … Continue reading उपनिषद गंगा