आराम करो

एक मित्र मिले, बोले, "लाला, तुम किस चक्की का खाते हो? इस डेढ़ छँटाक के राशन में भी तोंद बढ़ाए जाते हो। क्या रक्खा है माँस बढ़ाने में, मनहूस, अक्ल से काम करो। संक्रान्ति-काल की बेला है, मर मिटो, जगत में नाम करो।" हम बोले, "रहने दो लेक्चर, पुरुषों को मत बदनाम करो। इस दौड़-धूप … Continue reading आराम करो

बीस बरस का बेटा उपदेशें देता है

बीस बरस का बेटा उपदेशें देता है। मुँह में डाला जीभ, जीभ को दी भाषा किन्तु कह न पाए शायद, तौल के बोले सम्भाषा , अब तीरनुमा शब्दों को उनपर ही छोड़े देता है। बीस बरस का बेटा उपदेशें देता है। दिन बड़ा ही शुभ था कि जब तुम आए थे बर्तन बजी , बजी … Continue reading बीस बरस का बेटा उपदेशें देता है

गाँधीजी के जन्मदिन पर

मैं फिर जनम लूँगा फिर मैं इसी जगह आऊँगा उचटती निगाहों की भीड़ में अभावों के बीच लोगों की क्षत-विक्षत पीठ सहलाऊँगा लँगड़ाकर चलते हुए पावों को कंधा दूँगा गिरी हुई पद-मर्दित पराजित विवशता को बाँहों में उठाऊँगा ।   इस समूह में इन अनगिनत अचीन्ही आवाज़ों में कैसा दर्द है कोई नहीं सुनता ! पर … Continue reading गाँधीजी के जन्मदिन पर