‘कितने पाकिस्तान’

'कितने पाकिस्तान' सन् 2000 में लिखी गई कमलेश्वर की पुस्तक है। तथ्य और आलोचना से समृद्ध यह उपन्यास स्वयं में इतिहास के एक खजाने से कम नहीं है। मानव इतिहास के साथ इसमें राष्ट्रवाद, साम्प्रदायिकता और पश्चिमवाद पर खुलकर टिप्पणी की गई है। अनेकानेक उदाहरण देते हुए कमलेश्वर ने यह समझाया है कि समाज के … Continue reading ‘कितने पाकिस्तान’

गज़ल

जीने में आज भी खूं ये हमारी सलीका रखती हैं, छोटों से प्यार करती हैं बड़ों का मान रखती हैं।।   बड़ी ही शिद्दत से कमाई है हमने ये तालीम, बज़्म-ए-हय़ात आज भी कब्रगाहों को याद करती है।।   शिकन आती नहीं कभी इस चेहरे की शान पर, घर की तरबियत बाहर के फैसलों में … Continue reading गज़ल

शौख़

'शौख़' – यह शब्द सुनने में ही मज़ेदार है। इसके अन्दाज़ भी कुछ इसके नाम जैसे ही निराले हैं। हर इंसान की चाहत होती है कि वो अपने शौख़ पूरे करे। लेकिन मज़े की बात यह है कि इस 'नाचीज़' शब्द ने अपने कुछ नखरें बना रखे हैं। शौख़ पूरे होने से आप असल में … Continue reading शौख़