प्रतीक्षा

चुप्पी साधे एक लड़कीजो बीच-बीच में हंसी की फुहार दबा नहीं पातीअपने कंठ से निकले ऊँचे स्वरों को कोसती है।वह ज्यादा बोलती नहीं,बस सोचती है।घुल जाती है वो मीठी प्रेम-कविताओं की चाशनी में,मिल जाती है वो इंद्रधनुष के रंगों में,सिमट जाती है वो मयूर के पंखों में,और निखर उठती है सफ़ेद-पीली धूप में।खिलखिलाते चेहरों में … Continue reading प्रतीक्षा