आखिरी मिलन

पूर्ण चेतना में प्रिय हुआ आखिरी मिलन! ग्रह नक्षत्रों का कोई विशिष्ट संयोग न था किसी अलौकिक शक्ति से प्रेरित समानांतर कल का योग न था दो स्वच्छ, पवित्र पुलकित हृदय ने, स्वेच्छा से स्वभाग दिया पवित्रता की परम कसौटी का दो हृदय ने आभास किया। पुनर्विदित था दोनों को यह आखिरी स्पर्श होगा साँसों … Continue reading आखिरी मिलन

हिन्दी की कलम से…

कुछ विचार कौंधे खाली पड़े दिमाग में सोचा क्यूँ ना कविता का रूप दूँ इसे, आवाज लगाई हिंदी को काफी ढूँढा जाकर मिली सुनसान खंडहर में खटिया डाल पसरी हुई थी कोने में, क़दमों की आहट से घबराकर जाग उठी हैरान मैं, पूछ बैठा यूँ निट्ठली क्यूँ पड़ी हो? बौखला उठी हिंदी, रास नहीं आया … Continue reading हिन्दी की कलम से…

काव्यांजलि

नमन उस अटल को, जो शख्सियत विशाल था मिल गया उस मिट्टी में, जिसका वो लाल था अटल से अटल की लड़ाई थी जीत कर मौत भी इठलाई थी   पराजित अटल, विजेता भी अटल दूसरे में, आखिर कहाँ था बल!   विधि के विधान में, मौत के सम्मान में किया उसने शत-शत नमन छोड़ … Continue reading काव्यांजलि

बाबा, मेरे उत्तर…

बाबा, कुछ सवाल पूछूँगी। जवाब दोगे ना ? बोलो! दोगे न ? क्यों पहनते हो वही इक कुर्ता होली और दिवाली में ? क्यों सर्दी में नहीं पहनते भैया-से जूते ? क्यों आते हो रात को देरी से ? जबकि शाम तक ही रहता ऑफिस तुम्हारा। क्यों अब स्कूटर से नहीं जाते काम पर, और … Continue reading बाबा, मेरे उत्तर…

राय, तुम यहाँ थे !

​२४ का १४ १० का ९ १५ का ५६ १४ का ३४..... चार साल के कमरों को गिनने के लय में, मैं अपने कॉलेज की आखिरी दिने गिन रहा था। दिन जैसे शून्य में गुज़र रहे थे।। कॉलेज ऐसा नशा बन चुका था, जिसे छोड़ने का मन नही कर रहा था। बी.आई.टी का हर कोना … Continue reading राय, तुम यहाँ थे !

बिटिया की पाती:माँ के नाम

माँ, कल मैं अलमारी साफ कर रही थी । हाँ, कर लेती हूँ अब,आप जो नहीं हैं मेरे पास। अलमारी में उमड़े तूफ़ान से लड़ते लड़ते थक कर सुस्ताने बैठी तो आप ही जेहन में थीं।कितना आसान था सबकुछ, सारी उधेड़बुन से निकलना ,चाहे वो अलमारी की बात हो या मुश्किलों की... और न जाने … Continue reading बिटिया की पाती:माँ के नाम