माँ का लाल

जंग के मैदान में लाल था, बेचारी माँ का हाल बेहाल था। उसकी एक झलक को तड़पती पर लाल पर देश की रक्षा का भार था। माँ का दर्द हवाओं ने उस तक पहुँचाया, "कैसा निर्मोही है तू!" उन फिज़ाओं ने उसके कानों में बुदबुदाया। नम तो उसकी भी आँखें थी, उसने भी अपना दुखड़ा … Continue reading माँ का लाल

और फिर सुबह भी हो गई…

अहले सुबह की बात थी, बीती अभी ही रात थी। बह रही चारों तरफ़, आदित्य की प्रकाश थी। सबमें नई ऊर्जा, नई उमंग औ उल्लास थी। हर नजर में सज रही, नूतन सुनहरी ख्वाब थी। ये उस पहर की बात थी, पहली पहर की बात थी। पौ फटने लग गई, चिड़िया चहकने लग गई। नजरें … Continue reading और फिर सुबह भी हो गई…

यादें…गुज़रे लम्हों की !

"कल बिछड़ जाएँ हम...या अलग हो जाएँ ये रास्ते... इनका कभी गम न कीजियेगा , बस इतना सा अरमान है हमारा दोस्तों...आप सब के दिल में जो प्यार है हमारे लिए उनको कभी कम न कीजियेगा।" कल बिछड़ जाएँ हम…या अलग हो जाएँ ये रास्ते… इनका कभी गम न कीजियेगा , बस इतना सा अरमान … Continue reading यादें…गुज़रे लम्हों की !

कि यादें जुड़ गई है तुमसे ….

कि यादें जुड़ गई हैं तुमसे , वैसे तो तुम कुछ ख़ास पसंद नहीं थे मुझे , पर अब जब तुमसे दूर जाने की सोचता हूँ , तो मन बेचैन सा हो उठता है | बेपरवाह होना तुमसे सीखा , और सीखी तुमसे रुहानियत , आँखें झुकाने से सर उठाने का सफर , भी तो … Continue reading कि यादें जुड़ गई है तुमसे ….