निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।

– श्री भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

हमारी मातृभाषा एवं संस्कृति ही वह डोर है जो हमें हमारे देश से जोड़े रखती है। तत्कालीन समय में हमारी पीढ़ी धीरे-धीरे अपनी मातृभाषा से दूर होती जा रही है और इसके साथ-साथ विविधताओं में भी एकता का पहचान रखने वाला अपना देश ‘भारत’ अपनी विविधता को धीरे-धीरे खोता जा रहा है। यह हमारा कर्तव्य है कि हम सब अपनी मातृभाषा को विलुप्त न होने दें, तथा प्रेम व सम्मान के साथ इसकी मर्यादा की रक्षा करें।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ के उपलक्ष पर दिनांक 21 फरवरी, 2020 को बी.आई.टी. सिंदरी के प्रांगण में एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के माननीय निदेशक डॉ. डी.के. सिंह के निर्देशन में संस्थान की प्रतिनिधि पत्रिका ‘सर्जना’ तथा गांधी रचनात्मक समिति द्वारा किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन श्री जे.पी. सिंह, श्री आर.के. वर्मा तथा श्री विजय पांडेय द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों के बीच उनकी मातृभाषा को बढ़ावा देना तथा उसके महत्व को उजागर करना था। कार्यक्रम का शुभारम्भ सुबह 9:45 से एल.एच. 001 तथा 002 में हुआ। अपनी-अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम तथा सम्मान दर्शाने हेतु सभी वर्ष के छात्रों ने इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत छात्रों को मातृभाषा का महत्व बताकर किया गया। आयोजित कार्यक्रम दो खंडों में विभाजित था-

लिखित
इस खंड में प्रतिभागियों को हिंदी में चार शीर्षक दिए गए थे-
(क) अहिंसा परमोधर्म:
(ख) कला और जीवन
(ग) वसुधैव कुटुम्बकम्
(घ)मातृभाषा- राष्ट्रीय एकता का मूल

उपर्युक्त विषयों में से किसी एक पर सभी प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन करते हुए अपने भावों को अपनी लेखनी द्वारा एक साकार रूप देना था। इसके लिए उन्हें एक घंटे का समय दिया गया।

मौखिक
मौखिक खंड दो भागों में विभाजित था-

(क) कविता पाठ : इस खंड में प्रतिभागियों ने अपनी मातृभाषा में स्वरचित या अपने पसंदीदा कवि द्वारा रचित कविता अथवा शायरी का पाठ किया जिसके लिए उन्हें ढाई मिनट का समय प्रदान किया गया था।सभी प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्ण ढंग से अपनी कविता एवं शायरी को सभी के समक्ष प्रस्तुत किया।

(ख) गायन खंड : इस खंड में प्रत्येक प्रतिभागी ने अपनी मातृभाषा में लोक गीत, सूफी अथवा देशभक्ति गीत गाया जिसके लिए उन्हें तीन मिनट का समय प्रदान किया गया था। प्रतिभागियों नें अपने मधुर स्वर से माहौल को रमणीय बना दिया।

विभिन्न खंडों के विजेताओं के नाम कुछ इस प्रकार से हैं-


लिखित
प्रथम: योगेश कुमार
द्वितीय: अलका कुमारी
तृतीय: नदीम रहमान आलम


कविता पाठन
प्रथम: परवेज अहमद
द्वितीय: अजय कुमार
तृतीय: पीयूष कुमार


गायन
प्रथम: कुमार सानू
द्वितीय: देवेश कुमार
तृतीय: केशर सोनल

कार्यक्रम के अंत में सभी विजेताओं को श्री आर.के. वर्मा द्वारा मेडल एवं प्रमाणपत्र से पुरस्कृत किया गया। तत्पश्चात उन्होंने कार्यक्रम संबंधित अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने विजेताओं को बधाई देते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने अपनी एक स्वरचित कविता भी श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत की।

राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया गया।

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