वर्तमान समय में जहाँ आंग्ल भाषा एक विशाल समुद्र के भाँति फैला हुआ है वहीं हिंदी की सदानीरा को प्रवाहित रखने हेतु हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत सर्जना परिवार द्वारा बी.आई.टी. के प्रांगण में १७ सितंबर २०१९ को हिंदी दिवस का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आई.टी. बिल्डिंग के F-9 में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ सर्जना के प्रभारी प्राध्यापक प्रो(डॉ) विजय पांडेय तथा सहायक प्रभारी प्राध्यापक डॉ अरविंद सिंह के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। तत्पश्चात डॉ अरविन्द सिंह ने हिंदी दिवस तथा हिंदी से संबंधित अपने विचार छात्रों से साझा किए। उन्होंने कहा कि भीड़ से अलग पहचान बनाने के लिए हिन्दी एक सशक्त माध्यम है। महात्मा गाँधी ने कहा है,“राष्ट्र भाषा के बिना राष्ट्र गूँगा होता है।” ११ सितंबर को स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में शुद्ध हिन्दी में भाषण दिया। ३ दिन बाद १४ सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है और यह महज़ एक संयोग नहीं है।

समारोह मुख्यतः पाँच खंडों में विभाजित था जो इस प्रकार हैं –

१. सर्जना इतिहास

इस खंड में सर्जना सदस्य द्वारा सर्जना के इतिहास पर प्रकाश डाला गया। इस सफर में आने वाले हर उतार-चढ़ाव का सामना करते हुए कैसे सर्जना आज संस्थान में साहित्य एवं सूचना का मुख्य वाहक बन गया है, इसकी एक छोटी सी झलक दी गई।

२. मर्मस्पर्श

बात साहित्य की हो और उसमें बच्चों की मासूमियत को शामिल न किया जाए तो यह साहित्य के साथ अन्याय होगा। स्वयंसेवी संस्था ‘प्रयास इंडिया’ के नन्हें-मुन्ने बच्चों के लिये विशेष खंड मर्मस्पर्श का आयोजन किया गया। इस खंड में बच्चों के लिए कार्टून कोना तथा काव्यपाठ नामक प्रतियोगितायें थीं। बच्चों ने अत्यंत प्रभावशाली ढंग से सुंदर कविताओं का पाठ कर के खंड के नाम को सार्थक कर दिया। उनके द्वारा रचित चित्रों में न केवल कला बल्कि सुंदर उपदेश भी थे। बच्चों ने अपनी मासूमियत एवं काबिलियत से सब का मन मोह लिया।

३. साहित्यिक प्रश्नोत्तरी

इस खंड में प्रतिभागियों से हिन्दी साहित्य से जुड़े प्रश्न पूछे गए। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता दो चरणों में हुई। पहले चरण में लिखित परीक्षा हुई। इस चरण में दिए गए प्रश्नपत्र में 10 प्रश्न थे एवं हर प्रश्न के 4 विकल्प थे। प्रश्न साहित्य एवं व्याकरण से जुड़े थे। प्रतिभागी को सही विकल्प को चुनना था। पहले चरण के अंकों के आधार पर चयनित पांच प्रतिभागियों को दूसरे चरण में प्रवेश मिला। दूसरे चरण में प्रतिभागियों से साहित्य से जुड़े प्रश्न मौखिक रूप से पूछे गए। सबसे अधिक अंक अर्जित करने वाले क्रमशः तीन प्रतिभागियों को विजेता घोषित किया गया।

४. कालयापन

अपनी मातृभाषा में भावों की स्वच्छन्द अभिव्यक्ति के लिए यह मंच साहित्य प्रेमियों को प्रदान किया गया। इस खंड में प्रतिभागियों को स्वरचित रचनाओं का पाठ करना था। रचना की विधा पर किसी भी प्रकार की बाध्यता नहीं थी। प्रतिभागी कविता, कहानी, शायरी अथवा किसी भी अन्य रूप में अपने भाव व्यक्त कर सकते थे। जब प्रतिभागियों ने अपनी रचनाओं का पाठ करना शुरू किया तो पूरा वातावरण हिंदी साहित्य की ओज से ओत-प्रोत हो गया।

५. काव्य पाठ

पश्य देवस्य काव्यम न मार न जयर्ति।
ईश्वर की काव्य सृष्टि को देखो जो कभी न मरती है, न पुरानी होती है। कविताएँ समाज का निर्माण करती है एवं मानव को संवेदनशील बनाती है।
काव्य द्वारा प्रदत्त इसी ऊर्जा से भरा खंड था, ‘काव्यपाठ’। इस खंड में प्रतिभागियों को किसी भी कवि की हिंदी भाषा में रचित वीर अथवा शृंगार रस की कविता का पाठ करना था। प्रतिभागीयों ने जब मंच पर आकर वीर रस एवं शृंगार रस में रचित कविताओं का पाठ किया तो उनकी भाव-भंगिमा एवं उच्चारण से सभी श्रोतागण मोहित हो उठे।

इस कार्यक्रम के निर्णायक मंडली में सर्जना परिवार के अंतिम वर्ष के छात्र शामिल थे। विभिन्न खंडों के विजेताओं के नाम निम्न प्रकार से हैं –

साहित्यिक प्रश्नोत्तरी :
१. पल्लवी झा
सत्र २०१७
२. अभिषेक आश
सत्र २०१६
३. मिलन कश्यप
सत्र २०१८

कालयापन :
१. देवेश कुमार
सत्र २०१८
२. आदित्य देवराज
सत्र २०१६
३. सचिन कुमार
सत्र २०१६

काव्यपाठ :
१. आदित्य देवराज
सत्र २०१६
२. रश्मि झा
सत्र २०१७
३. अभिषेक आश
सत्र २०१६

मर्मसपर्श :
१. मेघनाथ कुमार सिंह
२. सोनाली कुमारी
३. संजना कुमारी
३. अनमिका कुमारी

इस अवसर पर छात्रों को प्रोत्साहित करने हेतु सर्जना परिवार की ओर से सभी शाखाओं में अव्वल स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। विजेताओं को भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ आर.के. वर्मा तथा डॉ अरविंद सिंह द्वारा पुरस्कृत किया गया। इसके पश्चात डॉ आर.के. वर्मा ने सभा को संबोधित किया। संबोधन में उन्होंने सर्वप्रथम अपनी एक स्वरचित कविता ‘फिर भी’ का पाठ किया। उनके द्वारा सर्जना को इस प्रकार के और भी कार्यक्रम जैसे कवि सम्मेलन इत्यादि का आयोजन कराने का सुझाव दिया गया। इस प्रकार के कार्यक्रम अधिक से अधिक आयोजित करवाने पर भी उन्होंने जोर दिया। अंततः उन्होंने पूरे सर्जना परिवार को कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाइयाँ दी।

अंत में सर्जना के मुख्य संपादक अभिनव प्रतीक के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन दिया गया। सर्जना के रीति के अनुसार कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

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