जीने में आज भी खूं ये हमारी सलीका रखती हैं, छोटों से प्यार करती हैं बड़ों का मान रखती हैं।। बड़ी ही शिद्दत से कमाई है हमने ये तालीम, बज़्म-ए-हय़ात आज भी कब्रगाहों को याद करती है।। शिकन आती नहीं कभी इस चेहरे की शान पर, घर की तरबियत बाहर के फैसलों में … Continue reading गज़ल
