माँ, याद तुम्हारी आती है

इस कमरे का एकाकीपन तन्हा है यह मेरा मन इस अंधियारे में तेरी याद यादों के दीप जलाती है, माँ, याद तुम्हारी आती है। पास के छत पर माँ कोई गोद के मुन्ने में खोई, कोमल थपकी दे-देकर जब लोरी कोई सुनाती है, माँ! याद तुम्हारी आती है। जब गर्म तवा छू जाता है हाथ … Continue reading माँ, याद तुम्हारी आती है

28 मई का दिन

यादों के पन्नों को पलटने जा रही हूँ। ज़िन्दगी के उन लम्हों को क्या आसान होगा दोहराना? कोशिश हुई, इन चार सालों को कलमबद्ध करने की, पर चन्द पंक्तियों में सार्थक न हुआ...यह सफ़र... इसलिये कल्पना को स्याही में समेट रही हूँ, एक पल ठहरना मेरे संग, तुम भी और सोचना वो 28 मई का … Continue reading 28 मई का दिन

A letter to my younger self…

प्यारी दीक्षा, हाँ जानती हूँ तुम्हारा नाम कुछ और है, पर तुम भी जानती हो कि यही तुम्हारा नाम है। तुमसे मिलने का दिल तो बहुत करता है पर क्या करूँ? न वक्त है और न ज़रिया। जानती हूँ कि जब तुम जानोगी कि मैं कौन हूँ तो कई सवालों के जवाब माँगना चाहोगी मुझसे … Continue reading A letter to my younger self…