राम को शेष अभी वनवास

प्रभु श्री राम क्या सिर्फ एक मनुष्य भर थे? नहीं...! प्रभु श्री राम स्वयं धर्म की परिभाषा भी थे। आज अनेक मानव श्री राम के जिन गुणों का बखान करते हुए दिखते हैं, आज उन गुणों का सर्वत्र लोप दिखाई देता है। ऐसा तो नहीं है कि मनुष्यों ने श्री राम को पूजना बंद कर दिया। … Continue reading राम को शेष अभी वनवास

आग हाथों में

आग वो हाथों में लगा के चलता है छूता है जिसको जला के चलता है   करता ही रहा है सिफारिश झूठ की फिर भी देखो सर उठा के चलता है   हुआ है पैगम्बर तारीकियों का अब चराग वो घरों के बुझा के चलता है   जमीर जिसने बेच दी और क्या करे वो … Continue reading आग हाथों में

गीत मेरे… नज़्म तेरे…

किस ओर चला है तू, पीछे छोड़ सारा जहान कुछ यादें है अनकही, कुछ नग़में हैं अनसुने उन अधूरे किस्सों को तन्हा छोड़, तू क्यों रहे तन्हा । सीने में उलझन किसी टूटे नज़्म-सी है इंतज़ार करे तो किसका...किस तरह... जिसे हो आता इन्हें अंतरतम की ध्वनियों में पिरोना जिसके अंतर से हो निकलते अधूरे … Continue reading गीत मेरे… नज़्म तेरे…

उपनिषद गंगा

हमारा देश 'भारत' विश्व गुरु रहा है, भारतीय दर्शन का आज भी विश्व में उच्चतम स्थान है और यदि हमें भारतीय मानस को समझना हो तो हमें सर्वप्रथम अपने वाङ्गमय को जानना होगा जिसमें उपनिषद् अनिवार्य है, क्या है उपनिषद्? उपनिषद् स्वयं को पहचानने की यात्रा है क्योंकि उपनिषद् जो दिखाई देता है उसकी बात … Continue reading उपनिषद गंगा

होली है…

Wikipedia होली को कुछ ऐसे define करती है, "A Hindu spring festival of colors"। आपका पता नहीं लेकिन मुझे इस definition से खासी परेशानी हुई। आखिर बचपन से ही होली खेलता आ रहा हूँ लेकिन कभी रंगों को धर्म पूछते नहीं देखा। ऐसी फितरत नहीं रंगों की। देखा है तो बस गुलाल हवा में उड़ते … Continue reading होली है…