“सत्ता और नवचेतना का संघर्ष: प्रेमाश्रम”

कुछ भाव ऐसे होते हैं जिन्हें समय भी बदल नहीं पाता। लालच, काम, क्रोध, ईर्ष्या, प्रेम और करुणा का प्रभाव आज जितना है, उतना ही पहले भी था। यही कारण है कि मुंशी प्रेमचंद की रचनाएँ आज के पाठकों में भी प्रचलित हैं। उनकी ‘गोदान’ और ‘निर्मला’ हर साहित्य-प्रेमी की पाठ्य-श्रृंखला का हिस्सा हैं। उनके … Continue reading “सत्ता और नवचेतना का संघर्ष: प्रेमाश्रम”