हर एक माल सौ रूपए

अगर आपको यह बोल दिया जाए कि आपको किताबें खरीदनी है तो आप पैसे दें। चलिए ठीक है! परंतु जब आपने उस किताब को एक बार अपने पुस्तकालय की अलमारी में रख दिया हो और उसे ही कुछ दिनों बाद पढ़ने की इच्छा से निकालना चाहते हों, तब भी आपको उसके लिए पैसे देने पड़ेंगे; … Continue reading हर एक माल सौ रूपए