वैश्विकरण के इस दौर में एक अभियंता देश के औद्योगिक विकास के साथ ही देश की सांस्कृतिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, यह बात इस पत्रिका से जुड़ने और इसकी जिम्मेदारी मिलने के बाद स्पष्ट हुई | यह ज्ञान की संवाहिका बनकर एक नया मार्ग प्रशस्त कर रही है और आशा है आगे भी करती रहेगी |

― विजय पाण्डेय, प्रभारी आचार्य ,‘सर्जना’