“सर्जना द्वारा एक तकनीकी संस्थान में साहित्य की लौ जलना बहुत ही सराहनीय कार्य है। आपलोगों को ज़रुरत है कि सभी विद्यार्थियों में साहित्य के प्रति लगाव बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करें आप उनके मन की बात सर्जना के माध्यम से करें। यह प्रयत्न करें कि आप जो लिखते हैं वो उनके व्यावहारिक जीवन में भी एक साकारात्मक प्रभाव डाले जीवन के हरेक पहलुओं में साहित्य की महत्ता को समझने की कोशिश करें। सर्जना के सभी सदस्यों को मेरी तरफ से बहुत शुभकामनाएँ। साहित्य से जुड़िये एवं लोगों को इससे जोड़ने की कोशिश कीजिये और साहित्य को महसूस कीजिये।” (३३वाँ  अंक )

― मुन्नवर राणा ( साहित्य अकादमी )