पराई बेटी

लिपट तेरे दामन से वो बिटिया यूँ रोने लगी कल तक तेरी परछाई कहने वाली, खुद को पराई कहने लगी खोल तेरा ओढ़ आई एक गुड़िया बासी-सी यादें वो उसकी, आज मेरे अल्फाज़ों में बहने लगी… दर्पण आँखों की तेरी, से खुद को सजाया करती है कभी आँगन में बैठ तेरे जुड़े बनाया करती है … Continue reading पराई बेटी

अस्तित्व सवाल करता है

कुछ इठला कर, एक बच्चे की तरह अभिमान भरी आँखों से, एक बूढ़े शेर की तरह व्यंग्य करता है; मेरा अस्तित्व मुझसे सवाल करता है।   रोज़ आईने में दिखती है एक धुंधली तस्वीर धूल जम गई है शायद मैं नहीं हूँ... मुझ पर हँसता है; मेरा अस्तित्व मुझसे सवाल करता है।   कौन हो … Continue reading अस्तित्व सवाल करता है

नन्हीं-सी माँ

रात अपने अंधकार में न जाने कितनी बातों को समेटे रखती है। जब हर ओर सन्नाटा होता है...और इसी सन्नाटे में कई ख्वाब खिलते हैं किन्हीं कच्ची आँखों में। वह भी कोई ऐसी ही रात थी, जब उसकी नींद करवटों में कट रही थी और आँखों को सपनों ने निगल रखा था। करवटें...जो कहीं न … Continue reading नन्हीं-सी माँ

मैं, चींटी और प्रेरणा

क्यों बैठा है सिर पर हाथ धरे पलकों पर अश्रु लिए हो अपनी मंजिल से परे; क्या, इतनी-सी है तेरी संसार! शून्य की भी प्राप्ति नहीं होती बिना उचित प्रयास किए क्यों बैठा है सिर पर हाथ धरे होकर, अपनी मंजिल से परे। मैं एक मामूली-सी चींटी हार का रस कभी न पीती असंख्य प्रयासों … Continue reading मैं, चींटी और प्रेरणा

नव-सर्जना

कल ढली शाम अलग थी, आज सुबह का रूप अलग है बह रही थी जो मंद-मंद कल तक, आज हवाओं का रुख अलग है डूब गया था जो अंधेरे में आज, सूरज की धूप अलग है। यह सुबह नई शुरुआत है नव-भारत के सृजन की राष्ट्र के निर्माण को, भारत-समुद्र के मंथन को। सुनो हुंकार … Continue reading नव-सर्जना

सोइशिरो होंडा: हौसले और हिम्मत की उड़ान

“अपनी असफलताओं को कभी भी अपने दिल तक जाने न दें, न ही अपनी सफलताओं को अपने मस्तिष्क तक।” जापान के एक स्कूल में परीक्षाफल घोषित हुए, और बच्चों से कहा गया कि अगले दिन अपने रिजल्ट पर सभी को अपने परिवार की मुहर लगा कर लानी है। यह आज के ज़माने में अभिभावकों के … Continue reading सोइशिरो होंडा: हौसले और हिम्मत की उड़ान

सीरिया: मनुष्य और मनुष्यता पर एक नज़र

आपकी भावनाएँ आपके विचारों की दासी हैं, और आप अपनी भावनाओं के दास हैं। ~एलिज़ाबेथ गिल्बर्ट   "मनुष्य सबसे संवेदनशील प्राणी है" ऐसा कहा जाता है। गौर करने की बात है कि यह कहता भी मनुष्य ही है; हम और आप। आज दुनिया में गंभीर हालात हैं। इसका कारण मनुष्य ही है, या यह कह … Continue reading सीरिया: मनुष्य और मनुष्यता पर एक नज़र