कि यादें जुड़ गई हैं तुमसे ,
वैसे तो तुम कुछ ख़ास पसंद नहीं थे मुझे ,
पर अब जब तुमसे दूर जाने की सोचता हूँ ,
तो मन बेचैन सा हो उठता है |

बेपरवाह होना तुमसे सीखा ,
और सीखी तुमसे रुहानियत ,
आँखें झुकाने से सर उठाने का सफर ,
भी तो हुआ तुमसे ही |

आखिरकार जाना ही तो था एक दिन ,
फिर क्यों इतनी तकलीफ ,
अरे हाँ..
कि यादें जुड़ गई हैं तुमसे |

किस्सों की तो कमी नहीं हमारे दरमियान
जिसमें साथ कुछ लोगों का हुआ ,
जाते-जाते वो छूट जाएंगे ,
कही अपने नक़्शे के ओर,
याद आएंगे वो |

सभी मिले बिछड़ने के लिए ,
इल्म न था मुझे कि ,
इतने अजीज़ हो जाओगे तुम ,
कि याद आओगे तुम ,
कि यादें जुड़ गई हैं तुमसे |

हाँ महबूब नहीं मगर ,
आशिकी हुई है तुमसे |
कई प्रेमकथा बुनी है तुमने ,
कई कहानी दफन है तुममें |
छोड़ो इन बातों को
बस याद आओगे तुम |

BIT को एक आखिरी बार ,
याद आओगे तुम ।

~मृत्युंजय कुमार

खनन अभियंत्रण ,सत्र २०१५

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