माँ शैल पुत्री

शैल शिखर से वृषभ यान पर
कैसे आ टपकी हो माँ ।
इन बच्चों के लिए न जाने ,
कहाँ-कहाँ भटकी हो माँ ।
जंगल -जंगल ,वन -उपवन में ,
खोज लिया मुझको निर्जन में,
यही सोच कर भूल न जाऊँ ,
श्वाँस तुम्हारी अटकी माँ ।।
इन बच्चों के लिए न जाने ,
कहाँ -कहाँ तू भटकी माँ ।।
इस मंदिर से उस मंदिर तक ,
महादेव का नाम सुमिर कर ।
देखा पिघल गया हिमगिरि तक ,
माया के सपनों में घिर कर ।
छलक गयी झरझर आँखों से ।
भर -भर कर के मटकी माँ ।
इन बच्चों के लिए न जाने ,
कहाँ- कहाँ भटकी हो माँ।।
दैहिक दैविक भौतिक ताप ,
हरे त्रिशूल सँभाली माँ ।
दया धर्म कल्याण ध्यान ले ,
कमल हाथ पधारी माँ ।
शुभ्र ज्योत्सना सौम्य स्वरूपा ,
पार्वती -शिव प्यारी माँ ।
मगन भगत है दया दृष्टि से ,
कर मन को परामर्जित माँ ।
विसर्जित होने से पहले ,
कुछ मै भी कर लूँ अर्जित माँ ।
अस्तित्व के लिए सती बन ,
काल घूँट को गटकी माँ ।।
इन बच्चों के लिए न जाने ,
कहाँ -कहाँ हो भटकी माँ ।।
जीवन में निस्पृह रहने का ,
जो संदेश तुम्हारा माँ ।
सद्प्रवृत्ति से सद्गति देकर,
हर लो क्लेश हमारा माँ ।
अष्ट सिद्धि नव निधि की देवि
सृष्टि जगत की सिद्धि दात्री ।
उद्धार करो हे माँ भारती ,
भगत जनों की शुभ नवरात्रि ।।
फुलवारी निगरानी रखना ,
लिए हाथ में लकुटी माँ ।।
इन बच्चों के लिए न जाने,
कहाँ -कहाँ तू भटकी माँ ।।

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