सहर्ष स्वीकार्य है मुझे तेरा प्रेम,
अगर वो श्वेत हो !
सहर्ष स्वीकार्य हैं मुझे तेरे विचार,
अगर वे श्वेत हों !

अगर आप पूछोगे कि मुझे श्वेत ही क्यों पसंद है?
श्वेत एक रंग नहीं एक स्वछता का भाव है |
स्वच्छ विचारों का, स्वच्छ आचरण का समभाव है,
मैं रंग भेद नहीं करता परन्तु मुझे श्वेत से प्यार है |

उस नीले गगन के अंदर भी श्वेत का प्यार छिपा है,
उस चाँद का क्या गुनाह जो पहले से ही श्वेत बना पड़ा है |
फिर मैं क्यों न करूँ प्यार उस श्वेत से ,
जिसने मेरे उमीदों का रुख मोड़ रखा है खुद पे |

क्या ऐसा है कि मैंने ही बस श्वेत को अपनाया है ,
कहीं ऐसा तो नहीं की श्वेत ने भी मुझे पाया है ?
इस श्वेत प्रेम ने मुझे जीवन जीना सिखाया है ,
स्वच्छ विचारों से मेरे जीवन को ओत -प्रोत बनाया है |

ये श्वेत रंग पवित्रता का प्रतीक है ,
शुभ अवसरों पे इसे पहनने की रीति है |
श्वेत रंग शांति और सद्भाव का परिचायक है ,
विकट परिस्थितियों का संकटमोचक और प्यार के इज़हार का नायक है |

संहार फिजाओं को सुर्ख बनता है ;
वो रक्त जो फिजाओं में बहता है,
श्वेत रंग ही उस संहार को आगे बढ़ने से बचाता है |
फिजायें जो सुर्ख हो गयी थी उन्हें फिर से श्वेत बनाता है |

ऐसे ही नहीं है मुझे श्वेत रंग से प्रेम ,
इसने मेरे जीवन को प्रभावित किया कुछ ऐसा ,
सुबह जगने पे सूरज की किरणें ताज़गी भर देती हैं जैसा |

हर्ष आनंद
वैद्युतिकी अभियंत्रण
द्वितीय वर्ष
क्रमांक-1701037

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