“आज भी महारानी देर से आएगी” गुस्से से रितु मैडम तमतमा रहीं थी। उनके यहाँ काम करने वाली सरला पिछले दो दिनों से देर से आ रही थी, जिसकी वजह से उनकी अति व्यस्त दिनचर्या गड़बड़ा रही थी। सरला जैसे ही आयी, रितु मैडम बरस पड़ी उसपर।” मज़ाक समझ के रखा है क्या काम को , हर दिन देर से आ रही हो। मुफ़्त के पंद्रह सौ रुपये नहीं देती तुम्हें । अगर निकाल दूंगी न, तो कहीं काम नही मिलेगा।” ” मैडम जी, दर्द बहुत..” सरला ने कहना चाहा, लेकिन वो बीच मे ही रोकते हुए बोलीं, “अरे, तो क्या दर्द से मरी जा रही थी? बहाने मत बनाओ” और वो तैयार होने अंदर चली गयी। सरला ने अपने आँसू पोछे और चुप-चाप काम मे लग गयी। उसके शरीर पर पड़े चोट के निशान चीख-चीख कर उसके दर्द को बयां कर रहे थे, लेकिन बड़ी -बड़ी बैठकों के सामने रितु मैडम को यह छोटी चीजें कहाँ दिखाई देती।
तभी रितु मैडम का फ़ोन घनघना उठा। आज उन्हें एक और गोष्ठी में भाषण देना था , महिलाओं के हक़ के बारे में, और उन्होंने अपना भाषण तैयार करना शुरू कर दिया , “सम्मान पाना हर स्त्री का अधिकार है, और चंद पैसे देकर उस से उसका सम्मान नही खरीदा जा सकता। हम लोगों को अपने आस -पास काम करने वाली महिलाओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और उनकी परेशानियों को समझना चाहिए”…वह अपने भाषण के अभ्यास में लग गईं।

~पल्लवी झा
विद्युत अभियंत्रण
2017

One thought on “स्त्री का सम्मान

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