​एक विकसित राष्ट्र की कल्पना तभी की जा सकती है जब उस राष्ट्र का प्रत्येक व्यक्ति शिक्षित हो ।

भारत के महान् स्वतंत्रता सेनानी, प्रसिद्ध शिक्षाविद् , स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री और ‘भारत रत्न’ से सम्मानित मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जन्म तिथि पर तकनीकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान बी०आई०टी सिंदरी में दिनांक 11/11/2017 को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया गया।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रमों को मद्देनज़र रखते हुए ,संस्थान के तीन प्रतिष्ठित संघ – गांधी रचनात्मक समिति , लिटरेरी सोसाइटी एवं सर्जना ( संस्थान की प्रतिनिधि पत्रिका) द्वारा छात्रों में शिक्षा के महत्व को उजागर करने हेतु निबंध – लेखन और आशुभाषण का सफल आयोजन किया गया जिसमें प्रथम वर्ष के छात्रों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया । इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संस्था के निदेशक डॉ डी०के० सिंह, सर्जना के प्रभारी प्राध्यापक प्रोफेसर रवि शंकर प्रसाद, लिटरेरी सोसाइटी के प्रभारी प्राध्यापक प्रोफेसर कुणाल कुमार, गांधी रचनात्मक समिति के प्रभारी प्राध्यापक प्रोफेसर जे पी सिंह एवंं प्राध्यापिका श्रीमती श्वेता कुमारी  उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत  संस्था के निदेशक डॉ डी०के० सिंह के मार्गदर्शी शब्दों के साथ हुई। स्छात्रों को संबोधित करते हुए उन्हें जीवन में शिक्षा के वास्तविक महत्व से अवगत कराया ।

अपने महत्वपूर्ण शब्दों को उन्होंने उदाहरणों से और आकर्षक और जीवंत बना दिया ।

साथ ही उन्होंने आत्मनिर्भर तथा आत्मविश्वासी होने का मूलमंत्र छात्रों को दिया । महान वैज्ञानिक आइंस्टीन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें ‘थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी‘ के लेख को बेकार कहकर जब छापने से मना कर दिया गया तो उन्होंने स्वयं पर विश्वास रखा और मैडम क्यूरी को अपना लेख दिखाया । उस वक्तव्य को मैडम क्यूरी ने कुछ इस प्रकार दिखाया –मुझे उनका लेख कुछ खास समझ मे नहीं आया किन्तु उनके आंखों की चमक बता रही थी कि उन्होंने कुछ असाधारण किया है “,और तब उसी मैगज़ीन ने कुछ इस प्रकार छापा –” दुनिया मे सिर्फ ढाई लोग ही इस रिलेटिविटी के सिद्धांत को समझ पाएं हैं , एक स्वयं आइंस्टाइन , दूसरा उनके सुपरवाइजर एवं आधा उनके मैगजीन के संपादक ।

छात्रों को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक

सर आइजक न्यूटन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक बार जब उनसे पूछा गया कि आप तो इतने बड़े वैज्ञानिक है , आप अपने ज्ञान को किस प्रकार आंकते हैं तो उन्होंने कुछ इस प्रकार उत्तर दिया – “मैं तो किनारे पर बैठकर सीपों को इकट्ठा कर रहा था,  सागर में मैंने गोता लगाया ही कहाँ !” अतः उन्होंने यह मूलमंत्र दिया की शिक्षा जितनी भी अर्जित की जाए कम है।

उनके भाषण के पश्चात गांधी रचनात्मक समिति की देख-रेख में प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें छात्रों ने  पूरे उत्साह से हिस्सा लिया व निम्न विषयों पर अपनी विचारों की अभिव्यक्त की ।

  • शिक्षा तंत्र में आवश्यक परिवर्तन। 
  • तकनीकी शिक्षा का देश के आर्थिक उत्पादन में योगदान ।
  • शिक्षा – सभी समस्या का अचूक शस्त्र।
  • सामूहिक परिचर्चा

निबंध लेखन प्रतियोगिता के बाद अब शिक्षा दिवस के अगले पड़ाव की ओर रुख किया गया जिसकी अध्यक्षता लिटररी सोसाइटी को सौंपी गई थी । इस पड़ाव में छात्रों को कुछ चुनिंदा विषय प्रदान किए गए थे जिस पर उन्हें बिना किसी तैयारी के केवल 2 मिनट की अल्पावधि में सोच कर विषयों के प्रति अपनी राय रखनी थी ।

इस दौरान विद्यार्थियों को तरह-तरह के विषयों के प्रति काफी कुछ जानने-सीखने को मिला । इस खंड के परिणाम के मद्देनजर 18 विद्यार्थियों को दूसरे चरण के लिए चुना गया  जिसमें  “भ्रष्टाचार वह मूल्य है जिसे हम लोकतंत्र के लिए भुगतान करते हैं  “, जैसे  गंभीर विषय पर प्रतिभागियों ने सामूहिक परिचर्चा हुई ।

 प्रभारी प्राध्यापक ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाई दी । तत्पश्चात राष्ट्र गान के साथ लेक्चर हॉल  में हो रहे कार्यक्रम का समापन हुआ।

उसके उपरांत सर्जना की अध्यक्षता में प्रथम वर्ष के विद्यार्थी एवं सर्जना सदस्यों द्वारा शिक्षा दिवस की रैली का आयोजन हुआ । छात्रों ने अपनी रचनात्मक कला का प्रदर्शन पोस्टर व स्लोगन के माध्यम से किया।इस दौरान संस्था के प्रभारी प्राध्यापक श्री रवि शंकर  एवं डॉक्टर कुणाल कुमार मौजूद थे ।”सब पढ़े , सब बढ़े” की नारेबाजी एक सुर में बी.आई.टी. प्रांगण में गूंज उठी ।

प्रतियोगिताओं का परिणाम कुछ इस प्रकार है-
निबंध लेखन –

अंग्रेज़ी खंड में –

  • प्रथम-  अंशुल कुमार मिश्रा ( यांत्रिकी अभियंत्रण)
  • द्वितीय – दिव्यांश रंजन ( रसायिनीक अभियंत्रण)
  • तृतीय – मोनिका मार्दी ( वैद्युतिकी अभियंत्रण)

हिन्दी खंड में  –

  • प्रथम – पल्लवी झा ( वैद्युतिकी अभियंत्रण )
  • द्वितीय – गंगा बसंत मुर्मू (उत्पादन अभियंत्रण)
  • तृतीय – अमन कुमार सिन्हा (वैद्युतिकी अभियंत्रण)

आशुभाषण प्रतियोगिता –

  • प्रथम – अनुराग सरकार
  • द्वितीय – पल्लवी झा (वैद्युतिकी अभियंत्रण),              दिव्यांश रंजन  (रासायनिक अभियंत्रण)
  • तृतीय- अनिब्रतो अधिकारी, स्वेता सुमन, सिद्धार्थ सिंह

पोस्टर व स्लोगन प्रतियोगिता –

  • प्रथम – रूम न०.18 (अदिति, डेज़ी मुर्मू, निरूपा मंडल)
  • द्वितीय- रूम न०. 10 (अनिशा भाव्या, अनुभा सिंह, काजल, गीतांजलि, अपर्णा राज)
  • तृतीय – रूम न०. 3 (नूतन, ऐलिस, स्वेता, कोमल, नम्रता)

सामूहिक परिचर्चा के विजेता 

आंखों में आशा और अध्यीयन की चाह के साथ इस संस्था के युवा, शिक्षा में विश्लेष्णाभत्मक कौशल के साथ ज्ञानवर्धन, तर्कसंगत विवेचना और यथार्थ कल्पना क्षमता के साथ आगे बढ़े,  इसी मार्गदर्शन के साथ शिक्षा दिवस का कार्यक्रम संपन्न हुआ।

One thought on “राष्ट्रीय शिक्षा दिवस

  1. हमारे देश में शिक्षा के महानतम स्रोत रहे हमारे शिक्षकों ने ही अपनी काबिलियत के दम पर हम विद्यार्थियों को विद्वता से परिचित कराया और मुश्किलों से बढती जिंदगियों को ज्ञान रूपी हवाओं के साथ आसमान की उंचाईयों तक पहुंचाने का कार्य किया परंतु न तो सरकार ने,न समाज ने और न ही कुछ के परिवार ने उन्हें वह सम्मान दिया जिसके वे हकदार थें।

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